शनिवार, 14 मार्च 2026

हिंदी ग़ज़ल के पचास वर्ष : ज्ञान प्रकाश विवेक


हिन्दी ग़ज़ल के पचास वर्ष : ज्ञान प्रकाश विवेक  

दुष्यंत कुमार के बनाए राजमार्ग पर चलते हुए हिन्दी ग़ज़ल ने पचास साल का सफ़र तय कर लिया है। हिन्दी ग़ज़ल में हिंदुस्तानियत की ख़ुशबू है। यहाँ के रीति-रिवाज, परंपरा, समाज, सियासत और संस्कृति से जुड़ाव हिंदी ग़ज़ल की ख़ासियत है।

​पिछली सदी के बहुत सारे ग़ज़लकार 'आकाश में सूराख़' करने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई पड़ते थे। इक्कीसवीं सदी की हिन्दी ग़ज़ल में विविधता और नयापन आया है। पहाड़ के दुर्गम रास्तों से निकलकर हिन्दी ग़ज़ल अब मैदानी इलाक़ों में आ गई है। हिंदी काव्य-परंपरा के किनारों को स्पर्श करते हुए वह अपनी धुन में आगे बढ़ रही है। इसलिए आज उसके प्रवाह में शोर-शराबे के बजाय कल-कल का संगीत सुनाई पड़ रहा है। वह नारों और झंडों को पीछे छोड़ चुकी है।

​ज्ञान प्रकाश विवेक के संपादन में 'श्वेतवर्णा प्रकाशन' (नोएडा) से प्रकाशित 'हिंदी गज़ल के पचास वर्ष' पुस्तक हिन्दी ग़ज़लों का एक ख़ूबसूरत गुलदस्ता है। यह ख़ुद में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। या यूँ कहें कि यह ख़ुद में एक समृद्ध हिन्दी ग़ज़लकोश है। इसमें 238 ऐसे हिन्दी ग़ज़लकार हैं शामिल हैं जिन्होंने दुष्यंत कुमार के बाद हिंदी ग़ज़ल को संवारने और निखारने में योगदान किया है। इस सूची में वरिष्ठ ग़ज़लकारों से लेकर कई युवा ग़ज़लकार भी शामिल हैं। 


अपनी महत्वपूर्ण भूमिका में ज्ञान जी ने हिन्दी ग़ज़ल की विकास यात्रा का बहुत सुन्दर आकलन पेश किया है। उनके अनुसार- "हिन्दी ग़ज़ल का व्यापक होता परिसर, इस बात की तस्दीक है कि हिन्दी ग़ज़ल लेखकों ने, गज़ल विधा में नया रचने का हर संभव प्रयास किया है। इस दौर में बहुत सशक्त, प्रयोगधर्मी और आकर्षण पैदा करती ग़ज़लें लिखी गई हैं। पचास वर्ष के सफ़र में ग़ज़ल ने विधा के रूप में अपना स्थान अर्जित किया है तो बात स्पष्ट है कि अच्छी ग़ज़लें अधिक लिखी गई हैं।" 

​एक दृष्टि सम्पन्न आलोचक होने के साथ ही ज्ञान प्रकाश विवेक बेहतरीन ग़ज़लकार भी हैं। बिना किसी भेदभाव के उन्होंने इस संकलन में ऐसे ग़ज़लकारों को भी शामिल किया है जो प्यार-मोहब्बत जैसे विषयों को भी अपनी ग़ज़ल में बख़ूबी अभिव्यक्त कर रहे हैं। कुल मिलाकर यह पुस्तक ग़ज़ल प्रेमियों और शोधार्थियों के लिए बेहद उपयोगी किताब है। इस नेक काम को अंजाम तक पहुँचाने के लिए संपादक ज्ञान प्रकाश विवेक और श्वेतवर्णा प्रकाशन को हार्दिक बधाई। 519 पेज़ की इस किताब का मूल्य 799 रूपये है। 

 

आपका : देवमणि पांडेय 98210 82126 

सम्पर्क : Shwetwarna Prakashan

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