अतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मुम्बई की महिला रचनाकारों के सवालों का जवाब देते हुए प्रख्यात साहित्यकार सूर्यबाला जी ने कहा-
▪️लेखन तो बेख़ुदी में होता है, संवेदना और भावना स्वतः शामिल हो जाती हैं।
▪️लेखन काग़ज़ पर वैसा नहीं उतर पाता जैसा एहसास में होता है।
▪️एक लेखक के भीतर हमेशा सच्चाई मौजूद रहती है, तभी वह लिख पाता है।
▪️कहानी लिखना एक प्रतिक्रिया है। हमारे भीतर जो चीज़ें घुमड़ती रहती हैं, वही कहानी के रूप में जन्म लेती हैं।
▪️'वेणु की डायरी' के वेणु और 'मेरे संधि पत्र' के रत्नेश मेरे प्रिय चरित्र हैं।
▪️लेखन मनुष्य के अंदर की शाश्वत अनुभूतियों पर आधारित होता है। मैं भी अपने अंदर की दुनिया पर लिखती हूँ।
▪️किसी के लिए पैसा आत्मविश्वास होता है। मेरे लिए मेरे चरित्र ही विश्वास और प्रेम का संबल रहे।
▪️ऊहापोह के बीच लेखन होता है, समय और सुविधा के अनुसार नहीं।
▪️लिखना जीवन के साथ न्याय करना है, दूसरों के साथ अन्याय करना नहीं।
▪️मेरी कहानियों में कहीं भी खलनायक या खलनायिका नहीं हैं।
▪️ख़ुद झुककर सामने वाले को जीतना चाहिए। कब झुकना है, यह समझ ज़रूरी है। तनकर खड़ा होने से आदमी टूट सकता है।
▪️हर लेखक की समस्या अलग होती है। विवाद में ख़ामोशी बड़ी ताक़त है। आदमी के भीतर धैर्य होना चाहिए।
▪️हम वस्तु नहीं हैं कि ख़ुद को प्लेट में परोसकर पेश करें।
कार्यक्रम के बाद श्रोताओं ने सूर्यबाला जी को अद्भुत वक्ता बताते हुए उनकी शालीनता और विनम्रता की मुक्त कंठ से तारीफ़ की। ख़ास बात यह थी कि जिस सलीक़े से सूर्यबाला जी ने दस महिलाओं के सवालों का संतुलित जवाब देते हुए उन्हें संतुष्ट किया वह अपने आप में बेमिसाल था। प्रतिष्ठित कथाकार-व्यंग्यकार सूर्यबाला से सृजन संवाद के अंतर्गत मुम्बई की दस रचनाकार महिलाओं ने सवाल पूछे। इनके नाम हैं-
1.रचना शंकर, 2.पारमिता षड़ंगी, 3.उषा साहू, 4.सोनाली बोस, 5.प्रज्ञा मिश्र 6.प्रतिमा सिन्हा, 7.अर्चना जौहरी, 8.लता हया, 9.सविता मनचंदा, 10.मधुबाला शुक्ल।
सूर्यबाला जी को यह बात बहुत अच्छी लगी कि श्रोताओं ने 'धर्मयुग' में धारावाहिक प्रकाशित उनके पहले उपन्यास 'मेरे सन्धिपत्र' से लेकर नवीनतम उपन्यास "कौन देस को वासी...वेणु की डायरी" से सम्बन्धित सवाल पूछे।
चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई की ओर से रविवार 8 मार्च 2026 को केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट गोरेगांव के मृणालताई हाल में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह आयोजित किया गया। शुरुआत में सूर्यबाला जी ने अपना आत्मकथ्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि मैं जो लिखना चाहती थी मैंने वही लिखा और आप लोगों को भी अपने मन का ही लेखन करना चाहिए।
बचपन में पिताजी जल्दी गुज़र गए थे। सूर्यबाला जी ने बताया कि उनका बचपन बहुत दुखद रहा। लेखनी उनके लिए दुखों की शरणस्थली थी। चरित्रों के दुख से पहले वे ख़ुद उस दुख से गुज़रती थीं। 'सारिका' के संपादक कमलेश्वर के सुझाव पर उन्होंने पहली कहानी 'जीजी' लिखी जो सारिका में प्रकाशित हुई।
चित्रनगरी सम्वाद मंच के संचालक देवमणि पांडेय के अनुरोध पर सूर्यबाला जी ने एक व्यंग्य रचना का पाठ किया- 'महिला दिवस और फ्रेंच टोस्ट' जिस पर तालियां बजीं और ठहाके भी लगे। अंत में कथाकार सूरज प्रकाश ने सूर्यबाला जी के लेखन की कुछ महत्वपूर्ण बातों का ज़िक्र करते हुए सभी को महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं।
चित्रनगरी संवाद मंच में लता हया और अर्चना जौहरी के लघु नाटक 'इतनी सी बात' की प्रस्तुति शानदार रही। राजस्थानी जेठानी और उत्तर प्रदेश की देवरानी की नोंक-झोंक का लोगों ने भरपूर लुत्फ़ उठाया। देवरानी-जेठानी के आपसी प्रेम और सौहार्द ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया। ढोलक की ताल पर झूमते हुए श्रोता ख़ुद भी लोकगीत की लय में शामिल हो गए थे।
लता हया और अर्चना जौहरी के दमदार अभिनय से यह मालूम ही नहीं पड़ा कि यह नाटक की पहली प्रस्तुति थी। जाने माने अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने दोनों अभिनेत्रियों के सहज अभिनय की तारीफ़ करते हुए उन्हें बधाई दी और कहा कि दोनों ने शुरू से अंत तक सबको बांधे रखा। कथाकार सूर्यबाला ने अभिनय के साथ ही नाटक के बढ़िया संवादों की भी तारीफ़ की और दोनों अभिनेत्रियों को शुभकामनाएं दीं। मधुबाला शुक्ल ने नाटक की प्रस्तावना पेश की।
आपका : देवमणि पांडेय, मो: 98210 82126




















