चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई के पांच साल चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई एक अनौपचारिक मंच है। हर रविवार इसके नियमित आयोजन में कविता पाठ, कहानी पाठ, नाटकों का मंचन, किताबों पर चर्चा, लेखक से मिलिए आदि कार्यक्रम होते हैं। बाहर से पधारे रचनाकारों के साथ सार्थक संवाद होता है और नये रचनाकारों को भी इस मंच पर भरपूर प्रोत्साहन दिया जाता है। पेश है ‘स्त्री दर्पण’ के लिए इसके संयोजक-संचालक देवमणि पांडेय से कथाकार-कवयित्री रीता दास राम की बातचीत।
प्रश्न-1: आप यह चित्रनगरी संवाद मंच कब से चला रहे हैं और कितने आयोजन कर चुके हैं?
अड्डेबाजी मेरा पुराना शौक़ है। जब मैं गोकुलधाम मुहल्ले में रहने के लिए आया तो अड्डेबाजी करने और मिलने जुलने के लिए फ़िल्मसिटी रोड, गोरेगांव पूर्व में होटल रॉयल चैलेंज के सामने एक कलात्मक जगह मिल गई- इडलिश कैफ़े। हमने तय किया कि प्रत्येक रविवार की शाम को खुले आसमान के नीचे 6 से 8 बजे हम नियमित यहां मिलेंगे। गपशप और चाय-काफ़ी का लुत्फ़ उठाएंगे।
मुम्बई के गोरेगांव उपनगर में फ़िल्म सिटी रोड के आसपास बहुत सारे लेखक, पत्रकार, रंगकर्मी, कलाकार, गायक, संगीतकार और अभिव्यक्ति के अन्य माध्यमों से जुड़े लोग रहते हैं। इन सबको आपस में एक मंच के ज़रिए जोड़ने के लिए हम कुछ मित्रों ने वरिष्ठ कथाकार सूरज प्रकाश की अगुवाई में जनवरी 2020 में एक मंच बनाया- "चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई।"
फ़िल्मसिटी रोड और आस पास रहने वाले जो रचनाकार कलाकार इस अड्डेबाजी में शुरुआती दिनों में शामिल हुए उनके नाम हैं सूरज प्रकाश, अशोक राजवाडे, रवींद्र कात्यायन, प्रेम रंजन अनिमेष, के पी सक्सेना ‘दूसरे’, प्रदीप गुप्ता, नवीन सी चतुर्वेदी, नवीन जोशी ‘नवा’, शैलेंद्र गौड़, राजीव जोशी, आर एस रावत, राजेश ऋतुपर्ण, राजू मिश्र, सविता दत्त तथा कुछ और साथी। लॉकडाउन (25 मार्च) के पहले, रविवार 22 मार्च 2020 को जो अड्डेबाजी हुई थी उसमें सिने गीतकार अभिलाष (इतनी शक्ति हमें देना दाता फेम) और नवगीतकार पं किरण मिश्र शामिल थे। कोरोना काल के दौरान इन दोनों साथियों का निधन हो गया।
इडलिश कैफ़े में कितने कार्यक्रम हुए इसकी गिनती मुश्किल है। मगर मेरी फेसबुक वाल पर सबकी रिपोर्ट चित्र के साथ उपलब्ध है। आगे चलकर मराठी लेखक मित्र अशोक राजवाड़े के सौजन्य से हमें केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट, गोरेगांव पश्चिम में मृणालताई हाल मिल गया। रविवार 3 जुलाई 2022 से वहां हर रविवार को सुचारू रूप से साप्ताहिक आयोजन होने लगे। अब तक वहां लगभग दो सौ कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं। उन कार्यक्रमों का ब्यौरा “चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई” के फेसबुक पेज पर देखा जा सकता है।
प्रश्न-2: चित्रनगरी संवाद मंच में किन किन विधाओं और विषयों को शामिल किया?चित्रनगरी संवाद मंच मुंबई एक अनौपचारिक मंच है। हर रविवार को इसके नियमित साप्ताहिक आयोजन में साहित्य चर्चा, कविता पाठ, कहानी पाठ, नाटकों का मंचन, किताबों पर चर्चा, सिने चर्चा, संगीत चर्चा, लेखक से मिलिए आदि कार्यक्रम होते हैं। नई किताबों के अंश का पाठ होता है। बाहर से पधारे रचनाकारों के साथ सार्थक संवाद होता है और नये रचनाकारों को भी इस मंच पर भरपूर प्रोत्साहन दिया जाता है।
प्रश्न-3: किन किन हस्तियों को यहाँ बुलाया गया या उन पर कार्यक्रम किया गया?
मुंबई के और देश के चुनिंदा रचनाकारों को समय-समय पर रचनात्मक संवाद के लिए चित्रनगरी संवाद मंच में आमंत्रित किया जाता है। मुंबई के लगभग सभी प्रमुख रचनाकार इसमें शिरकत कर चुके हैं। यहां आयोजित मुशायरों में मुम्बई के और बाहर के सौ से भी अधिक नामचीन शायर शिरकत कर चुके हैं।
मुंबई से बाहर के जिन रचनाकारों ने अपनी मौजूदगी से चित्रनगरी संवाद मंच की गरिमा बढ़ाई उनमें कुछ प्रमुख नाम हैं - तेजेंद्र शर्मा (यूके), भारतेंदु विमल (लंदन), रेखा राजवंशी (ऑस्ट्रेलिया) नरेश सक्सेना (लखनऊ), राजेश जोशी (भोपाल) असग़र वजाहत (दिल्ली) , एस आर हरनोट (शिमला), विमल कुमार (दिल्ली) प्रेम जनमेजय (दिल्ली), सुभाष चंदर (दिल्ली), राजेन्द्र गौतम (दिल्ली), सुभाष वशिष्ठ (दिल्ली) विभा रश्मि (दिल्ली), ममता जयंत (दिल्ली), प्रभात समीर (दिल्ली), सोनाली बोस (दिल्ली), अशोक भौमिक (इलाहाबाद) रतिभान त्रिपाठी (प्रयाग), प्रतुल जोशी (लखनऊ), डॉ हरि प्रकाश श्रीवास्तव (लखनऊ), मंजुल मिश्र 'मंज़र' (लखनऊ), चंद्रभाल सुकुमार (वाराणसी), इंद्रजीत सिंह (देहरादून), राजशेखर व्यास (उज्जैन) ओमा शर्मा (वडोदरा), जितेन्द्र भाटिया (जयपुर), सुधा अरोड़ा (बंगलोर) अनुराधा सिंह (बंगलोर), चारु चित्रा (ग्वालियर), राकेश अचल (ग्वालियर) आर के पालीवाल (भोपाल), विनोद नागर (भोपाल), विजय शंकर चतुर्वेदी (सतना), दिनकर शर्मा (झारखंड), घनश्याम अग्रवाल (अकोला), सुजीत सहगल (धर्मशाला), ज़ुबैर अंसारी (लखनऊ), आदिल रशीद (दिल्ली), सिद्धार्थ शांडिल्य (हैदराबाद), सोनू पाटील (नागपुर), सपना मूलचंदानी (अजमेर), तनोज दधीच (कोटा) और लोक गायक राकेश तिवारी (रायपुर)

प्रश्न-4: साहित्य का इससे कितना प्रचार प्रसार हुआ।
साहित्य का इससे कितना प्रचार प्रसार हुआ यह बताने के लिए मेरे पास कोई पैमाना नहीं है। मगर जो रचनाकार कलाकार चित्रनगरी संवाद मंच में आए उनको अपनी बात कहकर या अपनी रचना सुनाकर अच्छा लगा। श्रोताओं को भी इस अनौपचारिक संवाद में आनंद आया और उन्होंने ख़ुद को हमेशा समृद्ध महसूस किया। अब मैं किसी भी शहर में जाता हूं तो लोग चित्रनगरी संवाद मंच के बारे में पूछते हैं। इससे लगता है कि साहित्य का प्रचार प्रसार तो हो रहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि कई युवा रचनाकारों की शुरुआत हमारे मंच से हुई और उन्होंने काफ़ी नाम कमाया। मेरी फेसबुक वॉल पर और चित्रनगरी संवाद मंच के फेसबुक पेज पर हमारी सारी गतिविधियों की रिपोर्ट मौजूद है।
प्रश्न-5: श्रोताओं का फीड बैक क्या रहा?
चित्रनगरी संवाद मंच के बारे में श्रोताओं का फीडबैक हमेशा बहुत अच्छा रहा है। वे व्यक्तिगत रूप से फ़ोन करके भी अपनी प्रतिक्रिया बताते रहते हैं। श्रोताओं की राय को मानकर हम किसी रचनाकार का भाषण कराने के बजाय उनसे सवाल पूछते हैं और श्रोता भी सवाल पूछते हैं। इससे गंभीर विषय भी आसान हो जाता है। किसी को बोरियत नहीं होती। विश्व साहित्य के हिंदी अनुवाद पर बात करने के लिए जब कथाकार जितेंद्र भाटिया आए तो श्रोता उनसे दो घंटे तक सवाल पूछते रहे और कविता पाठ का सत्र स्थगित करना पड़ा। मधु कांकरिया की “ढाका डायरी” पर भी बढ़िया चर्चा हुई। स्त्री दर्पण के सौजन्य से आयोजित “स्त्री लेखन” पर आधारित चर्चा में श्रोताओं का भरपूर उत्साह दिखाई पड़ा। ओमा शर्मा के कहानी पाठ के बाद श्रोताओं ने उनसे इतने ज़्यादा सवाल पूछे कि वे दंग रह गए और उन्हें उत्तर देकर श्रोताओं की इस सहभागिता से बहुत ख़ुशी भी हुई।
सुप्रसिद्ध मराठी लेखक लक्ष्मण गायकवाड़ से उनके आत्मकथात्मक उपन्यास 'उचक्का' के बारे में सुनना बेहद रोमांचक रहा। प्रतिष्ठित मराठी लेखिका डॉ स्मिता दातार से वायलिन वादक पद्मश्री डी के दातार की जीवनी के अंश सुनना भी यादगार अनुभव रहा। प्रसन्नता की बात है कि हर रविवार सिर्फ़ व्हाट्सएप संदेश पर प्राय: तीस चालीस लोग इकट्ठा हो जाते हैं। एक बार प्रेमचंद जयंती कार्यक्रम में और दूसरी बार एक संगीत नाटक में 70 से ज़्यादा लोग आ गए तो अलग से कुर्सियां लगवानी पड़ीं।
प्रश्न-6: नाम चित्रनगरी है तो क्या फ़िल्म के लोग भी इसमें आये ?हम सिने जगत से ग्लैमरस कलाकारों के बजाय उन लोगों को बुलाना पसंद करते हैं जिनका रचनात्मकता से रिश्ता है। चित्रनगरी संवाद मंच में सविता बजाज, हिमानी शिवपुरी, कुलबीर बडेसरों, प्रतिभा सुमन शर्मा, शाइस्ता ख़ान, दीप्ति मिश्र, लता हया, असीमा भट्ट, पूर्वा पराग, अलका अमीन, रावी गुप्ता, कामना सिंह चंदेल जैसी कई प्रतिष्ठित अभिनेत्रियां शिरकत कर चुकी हैं। लेखक-निर्देशक रंजीत कपूर, लेखक-निर्देशक संजय छेल, फ़िल्म लेखक अशोक मिश्र, अभिनेता यशपाल शर्मा, लेखक-निर्देशक पवन कुमार, सिने गीतकार नवाब आरज़ू, सिने गीतकार अहमद वसी, अभिनेता दयाशंकर पांडेय, अभिनेता-निर्देशक ओम कटारे, लेखक-निर्देशक-अभिनेता विजय कुमार, पटकथा लेखक विजय पंडित, लेखक-निर्देशक दिनेश लखनपाल, अभिनेता बी शांतनु, लेखक-अभिनेता अभिराम भडकमकर, अभिनेता अरुण शेखर, फ़िल्म पत्रकार अजित राय, फ़िल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज, फ़िल्म पत्रकार पराग छापेकर, अभिनेता शैलेंद्र गौड़, आर जे प्रीति गौड़, सिने गीतकार संदीप नाथ, सिने गीतकार-गायक विनोद दुबे, सिने गीतकार शेखर अस्तित्व, पद्मश्री संगीतकार अली ग़नी, पार्श्वगायिका सोमा बनर्जी, पद्मश्री गायिका डॉ सोमा घोष और जाने माने अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने हमारे आयोजनों में शिरकत करके चित्रनगरी संवाद मंच की गरिमा बढ़ाई है।
प्रश्न-7: इन आयोजनों में आपको किस तरह का साहित्य सुनने को मिला। उसकी विविधता और गुणवत्ता कैसी लगी।
चित्रनगरी संवाद मंच में इस्मत चुगताई, प्रेमचंद, परसाई, शरद जोशी, मुक्तिबोध और कामता नाथ की कहानियों का मंचन हो चुका है। रंगकर्मी विजय कुमार द्वारा निर्देशित और मुहम्मद अली जिन्ना पर केंद्रित '5 अगस्त 1947' नाटक का पाठ यहां किया गया। लेखक ब्रत्य वसु के इस बांग्ला नाटक का हिंदी अनुवाद जैनद्र भारती ने किया है। तुलसीदास और अकबर की मुलाक़ात पर आधारित असग़र वजाहत के नाटक ‘महाबली’ का मंचन हुआ। मराठी रंगकर्मी आनंद माड़ये के नाट्य ग्रुप ने परसाई की कहानियों का मंचन किया। न्यूज़ चैनल की पत्रकारिता पर आधारित अरुण शेखर द्वारा लिखित निर्देशित व्यंग्य नाटक ‘आ से आम’ का पहला मंचन हुआ। असीमा भट्ट, दीप्ति मिश्र, लता हया और अर्चना जौहरी के लघु नाटकों का मंचन हुआ। सिने जगत की क़िस्सागोई पर आधारित पवन कुमार के संगीतमय नाटक ‘सिने फीलिया’ का मंचन हुआ।
आबिद सुरती और लक्ष्मण गायकवाड़ ने अपनी आत्मकथा सुनाई। जितेंद्र भाटिया और विजय कुमार महानगरों के अतीत पर लिखी हुई अपनी किताबों के साथ आए। असग़र वजाहत, एस आर हरनोट, ओमा शर्मा, मधु कांकरिया और सुधा अरोड़ा जैसे प्रतिष्ठित रचनाकारों ने कहानियां सुनाईं। नरेश सक्सेना और राजेश जोशी जैसे सुप्रसिद्ध कवियों के साथ संवाद करना और उनकी कविताओं को सुनना सबके लिए बहुत सुखद और प्रेरक रहा। रंजीत कपूर, अशोक मिश्र और संजय छेल जैसे फ़िल्म लेखकों से फ़िल्म लेखन की चुनौतियों पर चर्चा भी काफ़ी पसंद की गई। अभिनेता राजेन्द्र गुप्ता से प्रेमचंद की कहानी सुनना, सूरज प्रकाश से लेखकों की दुनिया के रोचक क़िस्से सुनना, रंगकर्मी मुजीब ख़ान से प्रेमचंद के क़िस्से सुनना, रीता दास राम से उनके जीवन की प्रेरक कथा सुनना, मशहूर सैलानी रेखा सुतार से पहाड़ों की दुर्गम यात्रा का वृतांत सुनना, लेखिका रश्मि रविजा से परिंदों की रोचक दुनिया के बारे में जानना या पद्मश्री गायिका डॉ सोमा घोष से चैती, कजरी और ठुमरी सुनना लोगों के लिए यादगार अनुभव रहा। यह विविधता ही चित्रनगरी संवाद मंच की पहचान है।
प्रश्न-8: चित्रनगरी संवाद मंच से नयी पीढ़ी को आपने जोड़ा?
नयी पीढ़ी में गद्य लेखक कम हैं। गीत, ग़ज़ल, कविता लिखने वाले ज़्यादा है। इन्हें जोड़ने के लिए हम कभी-कभी युवा कवि सम्मेलन, मुशायरा और कवयित्री सम्मेलन करते हैं। नाटकों के मंचन के समय भी नई पीढ़ी की मौजूदगी रहती है। चित्रनगरी संवाद मंच में प्राय: एक घंटे चर्चा और एक घंटे कविता पाठ का आयोजन होता है। कविता पाठ में नई पीढ़ी भरपूर उत्साह के साथ शिरकत करती है। यह अच्छी बात है कि कुछ महिलाओं ने अपनी पहली कहानी का पहला पाठ चित्रनगरी संवाद मंच में किया।एक युवा लेखिका डॉ मधुबाला शुक्ल को हमने संचालन के लिए प्रोत्साहित किया। अब वे भरपूर आत्म विश्वास के साथ बोलती हैं और लोग पसंद करते हैं।
प्रश्न-9: कुल मिलाकर आपका अनुभव कैसा रहा।कुल मिलाकर अनुभव बहुत अच्छा रहा। कोरोना ने तो लोगों को घरों में क़ैद कर दिया था। कई रचनाकार भी मानसिक अवसाद से गुज़र रहे थे। ऐसे माहौल में चित्रनगरी संवाद मंच के ज़रिए लोगों को मिलने-जुलने का, गपशप करने का अवसर मिला तो सभी को बहुत अच्छा लगा। प्रो नंदलाल पाठक 97 साल के हो चुके हैं। उन्होंने पूरे दमख़म के साथ जब चित्रनगरी संवाद मंच में ग़ज़लें सुनाईं तो श्रोता दंग रह गए। 90 साल के ढब्बू जी (आबिद सुरती) कई बार चित्रनगरी संवाद मंच में ठहाके लगवा चुके हैं। हम पहले 5 से 5:30 बजे चाय पीते हैं। एक दूजे का हाल पूछते हैं। इसके बाद 5:30 से 7:30 बजे तक कार्यक्रम होता है। समय की पाबंदी का फ़ायदा यह है कि लोग भोजन के समय अपने-अपने घर पहुंच जाते हैं। कई ऐसे रचनाकार हैं जो नियमित आते हैं क्योंकि उन्हें सुनना सुनाना अच्छा लगता है। मुझे भी मिलने मिलाने का यह सिलसिला अच्छा लगता है। कुंवर बेचैन का शेर है - मिलना जुलना रहे तो मेले हैं /वरना दुनिया में सब अकेले हैं।
चित्रनगरी सम्वाद मंच की एक आयोजन समिति है। इसमें सूरज प्रकाश, देवमणि पांडेय, सुभाष काबरा, राजेश ऋतुपर्ण और मधुबाला शुक्ल शामिल हैं। इससे आयोजनों की रूपरेखा निर्धारित करने में सहूलियत रहती है।
प्रश्न 10: चित्रनगरी संवाद मंच के अलावा आप और किस संस्था से जुड़े हैं उस बारे में जानकारी दीजिए।
चित्रनगरी संवाद मंच के अलावा मैं दो महत्वपूर्ण संस्थाओं में डायरेक्टर हूँ। ये हैं 'साहित्यायन फाउंडेशन' और 'इंशाद फाउंडेशन'। साहित्यायन फाउंडेशन की प्रवर्तक हैं मुंबई की प्रमुख उद्योगपति पद्मभूषण राजश्री बिरला। साहित्यायन फाउंडेशन के माध्यम से मुम्बई में दो अखिल भारतीय नए पुरस्कारों की शुरुआत हुई है। हिंदी काव्य साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए नंदलाल पाठक साहित्य पुरस्कार (₹ पांच लाख) और एक सम्भावनाशील युवा ग़ज़लकार को नंदलाल पाठक प्रतिभा पुरस्कार (₹ एक लाख) प्रदान किया जायेगा। यह दोनों पुरस्कार प्रतिवर्ष दिए जाएंगे।
इंशाद फाउंडेशन के प्रवर्तक हैं प्रतिष्ठित शायर नवीन जोशी 'नवा'। इंशाद के ज़रिए प्रतिभाशाली युवा कवियों को मंच प्रदान किया जाता है। इसके आयोजन मुंबई से बाहर भी पुणे, बड़ौदा, सूरत, दिल्ली, पटना, नागपुर, इंदौर आदि शहरों में हो चुके हैं। मुम्बई में 'नस्ल ए नौ भारत' नाम से युवा शायरों का अखिल भारतीय मुशायरा आयोजित किया जाता है। मुंबई के रंग शारदा सभागार में यह सिलसिला प्रतिवर्ष चलता रहेगा।
प्रश्न-11: चित्रनगरी संवाद मंच में शामिल मुम्बई के प्रमुख रचनाकार?
आबिद सुरती, लक्ष्मण गायकवाड़, विजय कुमार, मधु कांकरिया, मनहर चौहान, धीरेंद्र अस्थाना, अनूप सेठी, विनोद दास, हरीश पाठक, बोधिसत्व, करुणा शंकर उपाध्याय, प्रो राम बक्ष, प्रभात समीर, नंदलाल पाठक, सत्यदेव त्रिपाठी, विमल मिश्र, अभिलाष अवस्थी, रमन मिश्र, राकेश शर्मा, आशकरण अटल, सुभाष काबरा, संजीव निगम, अनंत श्रीमाली, हरि मृदुल, संजय भिसे, यूनुस ख़ान, गुलशन मदान, अनिल गौड़, यशपाल सिंह यश, रमाकांत शर्मा, गंगा शरण सिंह, उषा मिश्र, चित्रा देसाई, ममता सिंह, रश्मि रविजा, रीता दास राम, कमलेश पाठक, सुलभा कोरे, आभा बोधिसत्व, सीमा अग्रवाल, रेखा बब्बल, अलका शरर, अर्चना जौहरी, प्रज्ञा शर्मा, सम्वेदना रावत, प्रेमा झा जैसे ढेर सारे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। यहां आयोजित मुशायरों में मुम्बई के और बाहर के सौ से भी अधिक नामचीन शायर शिरकत कर चुके हैं जिनमें विजय अरुण, सागर त्रिपाठी, माधव बर्वे ‘नूर’, सिद्धार्थ शांडिल्य, नदीम सिद्दीक़ी, शाहिद लतीफ़ और नवीन सी चतुर्वेदी जैसे मशहूर क़लमकार शामिल हैं। प्रश्न-12: आपको साहित्य के भविष्य के बारे में क्या लगता है?
हमने अपने लेखन के शुरुआती दौर में पत्र पत्रिकाओं में छपकर अपनी पहचान बनाई थी। आज कोई मुझे सर्च करेगा तो उसे सबसे पहले ‘रेख़्ता’ या ‘कविता कोश’ का लिंक मिलेगा। आज का नया लेखक सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाता है। प्रिंट साहित्य भी ज़रूरी है मगर हमारे साहित्यकारों की सोशल मीडिया पर भी मौजूदगी ज़रूरी है। अपनी रचनाओं को अच्छी रिकॉर्डिंग के साथ यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म पर पेश करना भी इस दौर की ज़रूरत है। युवा पीढ़ी के लोग प्रिंट में पढ़ने के बजाय यूट्यूब पर कविता, कहानी सुनना ज़्यादा पसंद करते हैं। ज़्यादातर नौजवान मोबाइल में ही अपनी पसंद का साहित्य पढ़ते हैं। किताबों का महत्व आज भी क़ायम है। मुझे कई ऐसे नौजवान मिले जो घर में किताबें रखना और पढ़ना पसंद करते हैं। बदलते वक़्त के साथ रचनाकार अगर क़दम मिलाकर आगे बढ़ेगा तो बेहतर होगा। लेखन में जो बदलाव आ रहे हैं उन्हें भी स्वीकार करना होगा। सोशल मीडिया के इस दौर में भी जिसमें दम होगा वही टिकेगा।
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Reeta Das Ram