सोमवार, 9 मार्च 2026

चित्रनगरी संवाद मंच में कथाकार सूर्यबाला

चित्रनगरी संवाद मंच में कथाकार-व्यंग्यकार सूर्यबाला

अतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मुम्बई की महिला रचनाकारों के सवालों का जवाब देते हुए प्रख्यात साहित्यकार सूर्यबाला जी ने कहा-

▪️लेखन तो बेख़ुदी में होता है, संवेदना और भावना स्वतः शामिल हो जाती हैं।

▪️लेखन काग़ज़ पर वैसा नहीं उतर पाता जैसा एहसास में होता है।

▪️एक लेखक के भीतर हमेशा सच्चाई मौजूद रहती है, तभी वह लिख पाता है।

▪️कहानी लिखना एक प्रतिक्रिया है। हमारे भीतर जो चीज़ें घुमड़ती रहती हैं, वही कहानी के रूप में जन्म लेती हैं।

▪️'वेणु की डायरी' के वेणु और 'मेरे संधि पत्र' के रत्नेश मेरे प्रिय चरित्र हैं।

▪️लेखन मनुष्य के अंदर की शाश्वत अनुभूतियों पर आधारित होता है। मैं भी अपने अंदर की दुनिया पर लिखती हूँ।

▪️किसी के लिए पैसा आत्मविश्वास होता है। मेरे लिए मेरे चरित्र ही विश्वास और प्रेम का संबल रहे।

▪️ऊहापोह के बीच लेखन होता है, समय और सुविधा के अनुसार नहीं।

▪️लिखना जीवन के साथ न्याय करना है, दूसरों के साथ अन्याय करना नहीं।

▪️मेरी कहानियों में कहीं भी खलनायक या खलनायिका नहीं हैं।

​▪️ख़ुद झुककर सामने वाले को जीतना चाहिए। कब झुकना है, यह समझ ज़रूरी है। तनकर खड़ा होने से आदमी टूट सकता है।

▪️हर लेखक की समस्या अलग होती है। विवाद में ख़ामोशी बड़ी ताक़त है। आदमी के भीतर धैर्य होना चाहिए।

▪️हम वस्तु नहीं हैं कि ख़ुद को प्लेट में परोसकर पेश करें।

कार्यक्रम के बाद श्रोताओं ने सूर्यबाला जी को अद्भुत वक्ता बताते हुए उनकी शालीनता और विनम्रता की मुक्त कंठ से तारीफ़ की। ख़ास बात यह थी कि जिस सलीक़े से सूर्यबाला जी ने दस महिलाओं के सवालों का संतुलित जवाब देते हुए उन्हें संतुष्ट किया वह अपने आप में बेमिसाल था। प्रतिष्ठित कथाकार-व्यंग्यकार सूर्यबाला से सृजन संवाद के अंतर्गत मुम्बई की दस रचनाकार महिलाओं ने सवाल पूछे। इनके नाम हैं-

1.रचना शंकर,  2.पारमिता षड़ंगी, 3.उषा साहू, 4.सोनाली बोस, 5.प्रज्ञा मिश्र 6.प्रतिमा सिन्हा, 7.अर्चना जौहरी, 8.लता हया, 9.सविता मनचंदा,   10.मधुबाला शुक्ल।

सूर्यबाला जी को यह बात बहुत अच्छी लगी कि श्रोताओं ने 'धर्मयुग' में धारावाहिक प्रकाशित उनके पहले उपन्यास 'मेरे सन्धिपत्र' से लेकर नवीनतम उपन्यास "कौन देस को वासी...वेणु की डायरी" से सम्बन्धित सवाल पूछे।


चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई की ओर से रविवार 8 मार्च 2026 को केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट गोरेगांव के मृणालताई हाल में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह आयोजित किया गया। शुरुआत में सूर्यबाला जी ने अपना आत्मकथ्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि मैं जो लिखना चाहती थी मैंने वही लिखा और आप लोगों को भी अपने मन का ही लेखन करना चाहिए।

बचपन में पिताजी जल्दी गुज़र गए थे। सूर्यबाला जी ने बताया कि उनका बचपन बहुत दुखद रहा। लेखनी उनके लिए दुखों की शरणस्थली थी। चरित्रों के दुख से पहले वे ख़ुद उस दुख से गुज़रती थीं। 'सारिका' के संपादक कमलेश्वर के सुझाव पर उन्होंने पहली कहानी 'जीजी' लिखी जो सारिका में प्रकाशित हुई।

चित्रनगरी सम्वाद मंच के संचालक देवमणि पांडेय के अनुरोध पर सूर्यबाला जी ने एक व्यंग्य रचना का पाठ किया- 'महिला दिवस और फ्रेंच टोस्ट' जिस पर तालियां बजीं और ठहाके भी लगे। अंत में कथाकार सूरज प्रकाश ने सूर्यबाला जी के लेखन की कुछ महत्वपूर्ण बातों का ज़िक्र करते हुए सभी को महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं।

'इतनी सी बात' नाट्य प्रस्तुति 

​चित्रनगरी संवाद मंच में लता हया और अर्चना जौहरी के लघु नाटक 'इतनी सी बात' की प्रस्तुति शानदार रही। राजस्थानी जेठानी और उत्तर प्रदेश की देवरानी की नोंक-झोंक का लोगों ने भरपूर लुत्फ़ उठाया। देवरानी-जेठानी के आपसी प्रेम और सौहार्द ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया। ढोलक की ताल पर झूमते हुए श्रोता ख़ुद भी लोकगीत की लय में शामिल हो गए थे। 

लता हया और अर्चना जौहरी के दमदार अभिनय से यह मालूम ही नहीं पड़ा कि यह नाटक की पहली प्रस्तुति थी। जाने माने अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने दोनों अभिनेत्रियों के सहज अभिनय की तारीफ़ करते हुए उन्हें बधाई दी और कहा कि दोनों ने शुरू से अंत तक सबको बांधे रखा। कथाकार सूर्यबाला ने अभिनय के साथ ही नाटक के बढ़िया संवादों की भी तारीफ़ की और दोनों अभिनेत्रियों को शुभकामनाएं दीं। मधुबाला शुक्ल ने नाटक की प्रस्तावना पेश की।


आपका : देवमणि पांडेय, मो: 98210 82126 

गुरुवार, 5 मार्च 2026

आधुनिकता के बीच बनारस का स्वभाव

आधुनिकता के बीच बनारस का स्वभाव और संस्कृति

लखनऊ और सुलतानपुर की तरह वाराणसी यात्रा की भी स्मृतियां काफ़ी सुखद रहीं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप स्वयं प्रतिष्ठित ग़ज़लकार हैं। उनके संयोजन में बीएचयू के एम्फी पांडाल में आयोजित छात्र कल्याण केंद्र का कवि सम्मेलन मुशायरा किसी विराट उत्सव से कम नहीं था। रचनात्मकता का यह उत्सव शानदार और यादगार रहा। रूमानी शायरी के साथ यहाँ संजीदा गीत और गज़लों को विद्यार्थी समुदाय ने जिस जोश और उमंग के साथ सुना, वह बेहद क़ाबिले-तारीफ़ है। 


बाबा विश्वनाथ का स्पर्श दर्शन इस यात्रा की विशेष उपलब्धि रही। उसके बाद युवा शायर अंश प्रताप सिंह 'ग़ाफ़िल' के साथ नए भव्य कॉरिडोर से होते हुए जब हमने गंगा जी के दर्शन किए तो मन ख़ुशी से भर उठा। बनारस की गलियों में क़दम रखते ही लगा जैसे वक़्त ठहर गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास की गलियाँ आज भी वैसी ही हैं जैसी चालीस साल पहले थीं। हमने कचौड़ी गली की संकरी गली में जाकर स्वादिष्ट कचौड़ी का लुत्फ़ उठाया। गौरी केदारेश्वर मंदिर की पतली गली में इतनी भीड़ थी कि बड़ी मुश्किल से बाइक खड़ी करने की जगह मिली।


कुल मिलाकर आधुनिकता के राजमार्ग पर चलते हुए बनारस का स्वभाव और संस्कृति वही है। माहौल में वही मस्ती और फक्कड़पन है। हाँ, कॉरीडोर बनने के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर रहे हैं। 


वाराणसी के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी विद्या भूषण मिश्र इतने सरल और सहज हैं कि लगा ही नहीं कि हमारी पहली मुलाक़ात है। बतौर कवि लेखक उनकी पाँच पुस्तकें प्रकाशित हैं। उनके आवास पर बढ़िया गपशप हुई। मैंने, अंश प्रताप सिंह 'ग़ाफ़िल' और ख़ुद मिश्र जी ने ग़ज़लें सुनाईं। मिश्र जी ने हमें सनातन सम्वाद कथाएं  पुस्तक भेंट की। मशहूर फोटोग्राफर राजेश कुमार सिंह इस अवसर पर विशेष रूप से मौजूद थे। उन्होंने बड़ा ख़ूबसूरत टेबल कलेंडर भेंट जिसमें रामलला की अद्भुत तस्वीरें हैं। 


कुल मिलाकर वाराणसी की इस अनुपम यात्रा के दौरान कई सुखद और रोमांचक अनुभव हुए। हमारी स्मृतियों के ख़ज़ाने में ये सुनहरी यादें हमेशा सुरक्षित रहेंगी।

आपका : देवमणि पांडेय 98210 82126 

सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

लखनऊ में तुलसी परिवार का सम्मान समारोह

तुलसी परिवार का सम्मान समारोह एवं काव्य संध्या

लखनऊ की तहज़ीब से महकती विविधरंगी कविताओं की यह एक शानदार और यादगार शाम थी। श्रोताओं में अधिकांश ख़ुद भी रचनाकार थे। इस लिए सभी कवियों को भरपूर तवज्जो के साथ सुना गया। सभी की काव्य प्रस्तुति सराहनीय रही। सभी को करतल ध्वनि के साथ लोगों ने झूम झूमकर सुना। 


मुम्बई से पधारे शायर-सिने गीतकार देवमणि पांडेय के सम्मान में तुलसी परिवार की ओर से आयोजित इस काव्य संध्या की अध्यक्षता लखनऊ के जाने-माने शायर भूपेन्द्र सिंह 'होश' ने की। वरिष्ठ कवयित्री संध्या सिंह, प्रतिष्ठित दोहाकार दिनेश कुमार अवस्थी, श्रेष्ठ ग़ज़लकार चंद्रशेखर वर्मा, सनातन साहित्य के प्रखर क़लमकार अवधी हरि और तुलसी परिवार के अध्यक्ष एवं मानस मर्मज्ञ ओम मिश्र ने बतौर विशेष अतिथि आयोजन की गरिमा बढ़ाई। स्वस्ति वाचन के साथ अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर मुख्य अतिथि देवमणि पांडेय को सम्मानित किया गया। 


रविवार 22 फरवरी को शान्ति कुटी, लक्ष्मणपुरी, लखनऊ में आयोजित तुलसी परिवार की इस काव्य संध्या में 25 कवियों ने कविता पाठ किया। इनमें रश्मि शरद, सुरभि सिंह, वर्षा श्रीवास्तव, नीतू सिंह, प्रिया सिंह, अनुज अब्र, बलवंत सिंह, श्रीवास्तव बाहम, कुलदीप शुक्ला, नरेंद्र सिंह, निलेश ज्वाला, सत्यदेव सिंह, निर्भय निश्चल, गौरव गौरवान्वित, दीपक शर्मा सार्थक, अनुराग मिश्र, लोकेश त्रिपाठी और सुभाष चंद्र मिश्र का समावेश था। 


ख़ास बात यह रही कि इस आयोजन में गीत, ग़ज़ल, दोहा, मुक्तक, माहिया, सवैया, घनाक्षरी आदि कई काव्य विधाओं का जलवा देखने को मिला। कार्यक्रम के संयोजक, लोकप्रिय कवि योगी योगेश शुक्ला ने जहां अपने भावप्रवण गीत से दिलों के तार झंकृत किए वहीं अपने रोचक संचालन से कार्यक्रम को कामयाबी की मंज़िल तक पहुंचा दिया। 


कुल मिलाकर शब्द और सम्वेदना से लोगों के ज़हन को महकाती हुई इस काव्य संध्या ने कामयाबी का एक नया अध्याय लिख दिया। यह शानदार और जानदार आयोजन हमारी मधुर यादों में हमेशा मौजूद रहेगा। सभी सहभागियों को ढेर सारी बधाईयाँ और शुभकामनाएं। 


(लखनऊ 22 फरवरी, 2026)