कवि विनोद शंकर शुक्ल को अमीर ख़ुसरो पुरस्कार
लखनऊ के प्रतिष्ठित कवि विनोद शंकर शुक्ल 'विनोद' को उनके प्रबंध काव्य 'बरवै_विनोद' के लिए 22 मार्च 2026 को राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उत्तर प्रदेश की ओर से एक लाख रूपये के अमीर ख़ुसरो पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस रचनात्मक उपलब्धि के लिए विनोद जी को हार्दिक बधाई!
वन विभाग, उत्तर प्रदेश में डी.एफ.ओ. के पद से वर्ष 2017 में सेवानिवृत्त होने के बाद विनोद जी पूर्णरूपेण साहित्य साधना में रत हैं। लखनऊ यात्रा के दौरान उनसे साहित्य-चर्चा में बहुत आनंद आया। विनोद जी ने मुझे अपनी तीन पुस्तकें भेंट कीं-'बरवै-विनोद', 'विश्वामित्र-मेनका' और 'कुरुवंशी महान'।
पुरातन काव्य-परंपरा में विनोद जी की गहरी रुचि है। बरवै छंदों में उन्होंने 'बरवै-विनोद' का सृजन किया है। कहा जाता है कि बारह-सात मात्राओं वाले इस 'बरवै' छंद का नामकरण अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना ने किया था। इस छंद में रहीम की चर्चित पुस्तक है- 'बरवै नायिका भेद'। इसी छंद में महाकवि तुलसीदास ने भी 'बरवै रामायण' की रचना की।
रहीम और तुलसीदास के बरवै अवधी भाषा में हैं। विनोद जी ने खड़ी बोली हिंदी में इस छंद को ढालकर 'बरवै-विनोद' का सृजन किया है। इस पुस्तक में सात सौ इक्कीस बरवै छंदों को छ: शीर्षकों में समाहित किया गया है- सौंदर्य, वियोग, संयोग, वात्सल्य, दायित्व और ज्ञान-भक्ति। सरस भाषा, रोचक शैली और मनमोहक भावनाओं से समृद्ध यह एक उत्कृष्ट कृति है।
'कुरुवंशी महान' प्रबंध काव्य है। इसकी कथावस्तु महाभारत पर आधारित है। यह तेरह सर्गों में विभक्त है। इसका प्रत्येक सर्ग एक पृथक छंद में रचित है। 'विश्वामित्र-मेनका' खंडकाव्य में इन दो पात्रों के माध्यम से वैदिक कालीन आर्य संस्कृति की एक यशोगाथा प्रस्तुत की गई है। इसका अंतिम सर्ग 'हर्ष सर्ग' है जिसमें दुष्यंत की अपने पुत्र भरत एवं पत्नी शकुंतला से भेंट होती है। दुष्यंत उन्हें साथ लेकर अपनी राजधानी हस्तिनापुर वापस चले जाते हैं।सहज प्रवाह लिए हुए यह खंडकाव्य काफ़ी सरस है।
विनोद जी की लेखनी से निकली तीनों अनमोल कृतियाँ हिन्दी साहित्य जगत के लिए एक बहुमूल्य उपहार हैं और उनकी सृजनशीलता की महत्ता को प्रमाणित करती हैं। अवधी के पारंपरिक 'बरवै' छंद को खड़ी बोली की सरसता में पिरोकर विनोद जी ने आधुनिक हिंदी साहित्य में एक नया अध्याय जोड़ा है।
'कुरुवंशी महान' में महाभारत की महानता और 'विश्वामित्र-मेनका' में वैदिक कालीन संस्कृति का उदात्त चित्रण विनोद जी की गहरी शोधपरक दृष्टि और सांस्कृतिक निष्ठा को दर्शाता है। इन उत्कृष्ट रचनाओं के लिए आपको हार्दिक बधाई। हम सबकी मंगल कामना है कि आपकी लेखनी इसी प्रकार माँ भारती की सेवा में निरंतर गतिशील रहे।
▪️
आपका : देवमणि पांडेय 98210 82126
▪️▪️▪️


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें