डॉ.रचना आशा का जन्मदिन 21 मार्च को है। डॉ.रचना के जीवनसाथी उपेन्द्र राय सहारा समय (दिल्ली) में न्यूज़ डायरेक्टर हैं। मित्र उपेंद्र के जीवन का मूलमंत्र है- ‘बड़े लोग बड़ा काम नहीं करते, वे हर काम को अलग ढंग से करते हैं’। इसी नज़रिए के चलते उपेंद्र ने पिछले साल अपनी जीवन संगिनी डॉ.रचना का जन्मदिन अलग ढंग से मनाया। उन्होंने अपनी शरीक-ए-हयात को एक नायाब तोहफा दिया। ‘शायरी की एक शाम’ डॉ.रचना के नाम कर दी। उनकी तीन वर्षीय बेटी ऊर्जा अक्षरा ने जन्मदिन का केट काटकर ‘माँ’ लफ़्ज़ को सार्थकता प्रदान की । ‘माँ’ पर शायरी लिखकर पूरी दुनिया में मशहूर हो चुके शायर मुनव्वर राना को काव्यपाठ के लिए इस मौक़े पर ख़ास तौर से आमंत्रित किया गया था। मुनव्वर राना की रचनाधर्मिता और सरोकारों पर रोशनी डालने की ज़िम्मेदारी उपेंद्र ने मुझे सौंप दी।
मुनव्वर राना का परिचय कराते हुए मैंने कहा कि उनकी शायरी में रिश्तों की एक ऐसी सुगंध है जो हर उम्र और हर वर्ग के आदमी के दिलो दिमाग़ पर छा जाती है । शायरी का पारम्परिक अर्थ है औरत से बातचीत । अधिकतर शायरों ने ‘औरत’ को सिर्फ़ महबूबा समझा । मगर मुनव्वर राना ने औरत को औरत समझा । औरत जो बहन, बेटी और माँ होने के साथ साथ शरीके-हयात भी है । उनकी शायरी में रिश्तों के ये सभी रंग एक साथ मिलकर ज़िंदगी का इंद्रधनुष बनाते हैं । वे हिंदुस्तान के ऐसे अज़ीम-ओ-शान शायर हैं जिसने ‘माँ’ की शख़्सियत को ऐसी बुलंदी दी है जो पूरी दुनिया में बेमिसाल है। अपने डेढ़ घंटे के काव्यपाठ में मुनव्वर राना ने माँ पर कई शेर सुनाए-
ऐ अँधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया
माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया
ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूं मेरी माँ सजदे में रहती है
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई
मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई
इस तरह मेरे गुनाहों को धो देती है
माँ बहुत गुस्से में हो तो रो देती है
मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने धोया नहीं दुपट्टा अपना
जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है
अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
पिछले साल जब 21 मार्च 2009 को मुम्बई के पाँच सितारा होटल सहारा स्टार में जब यह आयोजन हुआ तो उपेंद्र राय की इस ख़ुशी में शरीक होने के लिए लखनऊ से सहारा इंडिया के डिप्टी एम.डी. ओ.पी.श्रीवास्तवजी पधारे तो मुम्बई से सहारा इंडिया के डॉयरेक्टर अभिजीत सरकार भी तशरीफ़ लाए। इस कार्यक्रम में उपस्थित कुछ प्रमुख लोगों में कुछ के नाम है- संजीव श्रीवास्तव (सम्पादक : बीबीबीसी इंडिया), अशोक कक्कड़ (ग्रुपप्रेसीडेंट : इंडिया बुल्स), जगदीश चंद्रा (सीईओ : ईटीवी), उमेश कामदार (निदेशक : माई डॉलर्स स्टोर्स), अभिनेत्री पूनम ढिल्लन, अभिनेत्री उर्वशी ढोलकिया, अभिनेत्री हेज़ल, अभिनेता सुशांत सिह, हास्यसम्राट राजू श्रीवास्तव और सुनीलपाल। इनके साथ ही एक दर्जन से अधिक आई.ए.एस. तथा आई.आर.एस. अधिकारी भी उपस्थित थे।
दस साल पहले राष्ट्रीय सहारा (लखनऊ) से अपना कैरियर शुरू करने वाले उपेंद्र राय निरंतर प्रगति के सोपान तय करते हुए आज सहारा मीडिया के सम्पादक व समाचार निदेशक हैं । ओशो के चिंतन को पसंद करने वले उपेंद्र राय उनके इस विचार से मुतास्सिर हैं कि कुछ नया करने के लिए जगह नहीं मन बदलने की ज़रूरत है । 11 फरवरी 2010 को हम लोग फिर आमने-सामने थे, यानी- डॉ.रचना, बेटी ऊर्जा अक्षरा, उपेंद्र, मैं और भाई मुनव्वर राणा। इंदौर के अभय प्रशाल स्टेडियम में गोपालदास नीरज, बेकल उत्साही और अनवर जलालपुरी जैसे वरिष्ठ शायरों तथा लगभग दस हज़ार लोगों की मौज़ूदगी में उपेंद्र राय को भरोसा युवा पत्रकार सम्मान से नवाज़ा गया । समारोह संचालन की ज़िम्मेदारी मुझे सौंपी गई। मंच पर चार केंद्रीय मंत्री उपस्थिति थे- बलराम जाखड़, फ़ारूक अब्दुल्ला, सलमान ख़ुर्शीद और सत्यप्रकाश जायसवाल। मेरा तवारूफ़ कराते हुए शायर मुनव्वर राणा ने पब्लिक के सामने कह दिया- देवमणि पाण्डेय मेरे अज़ीज़ दोस्त होने के साथ ही मेरे रिश्तेदार भी हैं क्योंकि इनके ज़िले सुलतानपुर में मेरा समधियाना है। इसी मंच पर भरोसा सम्मान वरिष्ठ शायर जावेद अख़्तर को और भरोसा युवा शायर सम्मान डॉ.तारिक क़मर (लखनऊ) को प्रदान किया गया। इसकी चर्चा फिर कभी। फिलहाल आईआईटी मुम्बई से बॉयोटेक्नॉलाजी में एमएससी एवं पीएचडी तथा जेआईआईटी (नोएडा) में बॉयोटेक्नॉलाजी की असिस्टेंट प्रोफेसर और संवेदनशील कवयित्री डॉ.रचना को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई।
आपका
देवमणिपांडेय
सम्पर्क
: बी-103, दिव्य स्तुति,
कन्या
पाडा, गोकुलधाम, फिल्मसिटी रोड,
गोरेगांव
पूर्व, मुम्बई-400063, 98210-82126
