सोमवार, 29 जून 2026

पोटली में चाँद : असलम हसन का काव्य संग्रह

 

पोटली में चाँद : असलम हसन का काव्य संग्रह

कहा जाता है कि बड़े शहरों ने बड़े लेखक नहीं दिए। जो बड़े लेखक महानगरों में दिखाई देते हैं वे अपने अनुभवों की गठरी गाँव से लेकर आए थे। असलम हसन के काव्य संग्रह 'पोटली में चाँद' को पढ़ते हुए यही महसूस होता है। उनकी कविताओं में गाँव की मिट्टी की सुगंध है। संयुक्त परिवार के रिश्तों की गर्माहट है। वे अपनी कविताओं के ज़रिए अपनी सोच, सरोकार और अनुभवों को असरदार ढंग से साझा करते हैं। उनके इसी नज़रिए को रेखांकित करने वाली कविता "तिलस्मी दुनिया" की कुछ पंक्तियां देखिए- 


ईंट ढोने वाले मज़दूर 

मिट्टी के घरों में बंद थे

जो बच्चे खीर खा सकते थे वे

माँड़ पी रहे थे


बेहतर सोचने वाले रील बना रहे थे

जिन्हें सुनना था

वे गाना गा रहे थे


और जो बोल सकते थे

उनकी ज़ुबान फिसल रही थी...


'पोटली में चाँद' की कविताएं हमारे वक़्त की आवाज़ हैं। सरल सहज भाषा में लिखी गईं इन कविताओं में समय और समाज की धड़कन शामिल है। इन कविताओं में निहित सम्वेदनाओं की ऊष्मा और भावनाओं की सुगंध को कोई भी सहृदय पाठक महसूस कर सकता है। 


संग्रह में कई लघु कविताएं हैं। कुछ कविताएं किसी सुविचार की तरह हमारे सामने आती हैं और कुछ कविताएं हाशिये पर खड़े वंचित लोगों का दर्द बयान करती हैं। "मेरी कविताएँ" कविता की कुछ पंक्तियां देखिए - 


कपाल की कठोर हड्डियों में कुशलता से 

टाँकता हूँ संवेदनाओं के पैबंद 

और इस तरह पृष्ठ के मध्य लिखता हूँ 

हाशिये का दर्द...


काव्यात्मक अभिव्यक्ति के ज़रिए कवि असलम हसन अपने समय और समाज के अहम् सवालों को सामने लाते हैं। हम जिस दौर में जी रहे हैं उस दौर को वे अपनी रचनात्मकता में साकार करते हैं। उनकी कविताओं में ज़िंदगी की दास्तान है। संघर्ष और सपने हैं। एक लघु कविता 'अपना गेहूँ' देखिए-


उधार का आटा आँचल में लेकर 

घर लौटती है वह शाम को अक्सर 

ठंडा चूल्हा पल भर जल कर 

सो जाता, फिर आँखें बंद कर 

सूनी आँखों में सपना बुन कर 

वह भी सोती है पहर भर 

रात भर उन आँखों का सपना 

सींचता रहता है गेहूँ अपना. 


ज़िंदगी के सफ़र में मुहब्बत के धागों से जो रिश्ते बुने जाते हैं उन रिश्तों में आत्मीयता की ख़ुशबू और एहसास की गहराई होती है। रिश्तों की यह ऊर्जा "पिता" और बेटी जैसी कविताओं में दिखाई पड़ती है। मुश्किल है आसां होना, कोलकाता, इक आग का दरिया था, मुंबई में बारिश, पाटलिपुत्र का हंसता हुआ बालक... आदि ऐसी कविताएं हैं जो इस संग्रह को सृजनात्मकता का दस्तावेज़ बना देती हैं। 


'पोटली में चाँद' संग्रह की कुछ कविताएं ग़ज़ल के फ्रेम में यानी छंद में हैं। इनमें जो कुछ कहा गया है वह अलग दृष्टि से कहा गया है। इन ग़ज़लों में फ़िक्र की आंच भी है और जज़्बात की नमी भी है। चंद शेर देखिए - 


है जिन्दगी तो एक सफ़र धूप छाँव का 

सूरज के आँख में है छुपी शाम देखना


ता-उम्र तेरे साथ ही चलता रहूँगा मैं 

ये हौसला ऐ गर्दिशे अय्याम देखना

▪️ 

तिनके-तिनके में हौसला देखो 

कभी फ़ुर्सत से घोंसला देखो


चूम लेगा फ़लक की पेशानी 

इन परिंदों का क़ाफ़िला देखो

▪️ 

मेरी नानी के मरते ही जुबाँ ख़ामोश है इनकी 

न मैना बोल सकती है न तोता बोल सकता है 


हसद की आग में दिन रात जो जलता है ए असलम 

वो अच्छा सोच सकता है न अच्छा बोल सकता है


'पोटली में चाँद' संग्रह की रचनाओं में भावनाओं की एक ऐसी तरंग है जो सीधे पाठकों के दिलों को छूती है। कवि अपने दिली जज़्बात, तजुर्बात, सामाजिक सरोकार और वक़्त के अहम् सवालों को अपनी इस काव्यात्मक अभिव्यक्ति में शामिल करने में कामयाब हुआ है। अभिव्यक्ति की सहजता और सोच की समृद्धि कवि को एक अलग पहचान अता करती है। 


मेरी दुआ है कि कवि असलम हसन इसी तरह रचनात्मकता के आकाश पर उड़ान भरते रहें। कविता के कैनवास पर भावनाओं के रंगों से ज़िंदगी की ख़ूबसूरत तस्वीर बनाते रहें। इस ख़ूबसूरत काव्य संग्रह 'पोटली में चाँद' के लिए उनको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।  

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आपका-

देवमणि पांडेय 

सम्पर्क : 98210-82126

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