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बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

दुनिया से जो मिला है : देवमणि पांडेय की ग़ज़ल




देवमणि पांडेय की ग़ज़ल

दुनिया से जो मिला है वह दर्द किससे बाँटें
पत्थर की बस्तियों में ये उम्र कैसे काटें

ये क्या हुआ लबों की मुस्कान क्यों है ज़ख़्मी
बच्चों को आप डाटें, ऐसे मगर न डाटें

है वक़्त का तक़ाज़ा नज़रों में वो हुनर हो
कंकर के ढेर से बस हीरों की आप छाँटें

दिन का हरेक लम्हा वो दर्द दे गया है
तारे न हम गिनें तो फिर रात कैसे काटें

आबाद होगी उस पल ख़्वाबों की एक दुनिया

जो बीच हैं दिलों के उन दूरियों को पाटें


देवमणि पांडेय : 98210-82126