गुरुवार, 5 मार्च 2026

आधुनिकता के बीच बनारस का स्वभाव

आधुनिकता के बीच बनारस का स्वभाव और संस्कृति

लखनऊ और सुलतानपुर की तरह वाराणसी यात्रा की भी स्मृतियां काफ़ी सुखद रहीं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप स्वयं प्रतिष्ठित ग़ज़लकार हैं। उनके संयोजन में बीएचयू के एम्फी पांडाल में आयोजित छात्र कल्याण केंद्र का कवि सम्मेलन मुशायरा किसी विराट उत्सव से कम नहीं था। रचनात्मकता का यह उत्सव शानदार और यादगार रहा। रूमानी शायरी के साथ यहाँ संजीदा गीत और गज़लों को विद्यार्थी समुदाय ने जिस जोश और उमंग के साथ सुना, वह बेहद क़ाबिले-तारीफ़ है। 


बाबा विश्वनाथ का स्पर्श दर्शन इस यात्रा की विशेष उपलब्धि रही। उसके बाद युवा शायर अंश प्रताप सिंह 'ग़ाफ़िल' के साथ नए भव्य कॉरिडोर से होते हुए जब हमने गंगा जी के दर्शन किए तो मन ख़ुशी से भर उठा। बनारस की गलियों में क़दम रखते ही लगा जैसे वक़्त ठहर गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास की गलियाँ आज भी वैसी ही हैं जैसी चालीस साल पहले थीं। हमने कचौड़ी गली की संकरी गली में जाकर स्वादिष्ट कचौड़ी का लुत्फ़ उठाया। गौरी केदारेश्वर मंदिर की पतली गली में इतनी भीड़ थी कि बड़ी मुश्किल से बाइक खड़ी करने की जगह मिली।


कुल मिलाकर आधुनिकता के राजमार्ग पर चलते हुए बनारस का स्वभाव और संस्कृति वही है। माहौल में वही मस्ती और फक्कड़पन है। हाँ, कॉरीडोर बनने के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर रहे हैं। 


वाराणसी के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी विद्या भूषण मिश्र इतने सरल और सहज हैं कि लगा ही नहीं कि हमारी पहली मुलाक़ात है। बतौर कवि लेखक उनकी पाँच पुस्तकें प्रकाशित हैं। उनके आवास पर बढ़िया गपशप हुई। मैंने, अंश प्रताप सिंह 'ग़ाफ़िल' और ख़ुद मिश्र जी ने ग़ज़लें सुनाईं। मिश्र जी ने हमें सनातन सम्वाद कथाएं  पुस्तक भेंट की। मशहूर फोटोग्राफर राजेश कुमार सिंह इस अवसर पर विशेष रूप से मौजूद थे। उन्होंने बड़ा ख़ूबसूरत टेबल कलेंडर भेंट जिसमें रामलला की अद्भुत तस्वीरें हैं। 


कुल मिलाकर वाराणसी की इस अनुपम यात्रा के दौरान कई सुखद और रोमांचक अनुभव हुए। हमारी स्मृतियों के ख़ज़ाने में ये सुनहरी यादें हमेशा सुरक्षित रहेंगी।

आपका : देवमणि पांडेय 98210 82126