सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

लखनऊ में तुलसी परिवार का सम्मान समारोह

तुलसी परिवार का सम्मान समारोह एवं काव्य संध्या

लखनऊ की तहज़ीब से महकती विविधरंगी कविताओं की यह एक शानदार और यादगार शाम थी। श्रोताओं में अधिकांश ख़ुद भी रचनाकार थे। इस लिए सभी कवियों को भरपूर तवज्जो के साथ सुना गया। सभी की काव्य प्रस्तुति सराहनीय रही। सभी को करतल ध्वनि के साथ लोगों ने झूम झूमकर सुना। 


मुम्बई से पधारे शायर-सिने गीतकार देवमणि पांडेय के सम्मान में तुलसी परिवार की ओर से आयोजित इस काव्य संध्या की अध्यक्षता लखनऊ के जाने-माने शायर भूपेन्द्र सिंह 'होश' ने की। वरिष्ठ कवयित्री संध्या सिंह, प्रतिष्ठित दोहाकार दिनेश कुमार अवस्थी, श्रेष्ठ ग़ज़लकार चंद्रशेखर वर्मा, सनातन साहित्य के प्रखर क़लमकार अवधी हरि और तुलसी परिवार के अध्यक्ष एवं मानस मर्मज्ञ ओम मिश्र ने बतौर विशेष अतिथि आयोजन की गरिमा बढ़ाई। स्वस्ति वाचन के साथ अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर मुख्य अतिथि देवमणि पांडेय को सम्मानित किया गया। 


रविवार 22 फरवरी को शान्ति कुटी, लक्ष्मणपुरी, लखनऊ में आयोजित तुलसी परिवार की इस काव्य संध्या में 25 कवियों ने कविता पाठ किया। इनमें रश्मि शरद, सुरभि सिंह, वर्षा श्रीवास्तव, नीतू सिंह, प्रिया सिंह, अनुज अब्र, बलवंत सिंह, श्रीवास्तव बाहम, कुलदीप शुक्ला, नरेंद्र सिंह, निलेश ज्वाला, सत्यदेव सिंह, निर्भय निश्चल, गौरव गौरवान्वित, दीपक शर्मा सार्थक, अनुराग मिश्र, लोकेश त्रिपाठी और सुभाष चंद्र मिश्र का समावेश था। 


ख़ास बात यह रही कि इस आयोजन में गीत, ग़ज़ल, दोहा, मुक्तक, माहिया, सवैया, घनाक्षरी आदि कई काव्य विधाओं का जलवा देखने को मिला। कार्यक्रम के संयोजक, लोकप्रिय कवि योगी योगेश शुक्ला ने जहां अपने भावप्रवण गीत से दिलों के तार झंकृत किए वहीं अपने रोचक संचालन से कार्यक्रम को कामयाबी की मंज़िल तक पहुंचा दिया। 


कुल मिलाकर शब्द और सम्वेदना से लोगों के ज़हन को महकाती हुई इस काव्य संध्या ने कामयाबी का एक नया अध्याय लिख दिया। यह शानदार और जानदार आयोजन हमारी मधुर यादों में हमेशा मौजूद रहेगा। सभी सहभागियों को ढेर सारी बधाईयाँ और शुभकामनाएं। 


(लखनऊ 22 फरवरी, 2026) 

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

डॉ रामजी तिवारी के साथ साहित्य चर्चा

सुलतानपुर में डॉ रामजी तिवारी के साथ साहित्य चर्चा

इश्क़ को दिल में दे जगह 'अकबर'
इल्म से शा'इरी नहीं आती

शाम सुलतानपुर में हमारी गपशप के दौरान डॉ रामजी तिवारी ने अकबर इलाहाबादी के इस शेर की याद दिलाई। सुलतानपुर के प्रतिष्ठित शायर हबीब अजमली, युवा शायर अलिफ़ सीन क़ादरी और डॉ तिवारी के सुपुत्र राहुल तिवारी ने मेरे साथ इस साहित्यक सत्संग का आनंद उठाया। डॉ रामजी तिवारी ज्ञान के अतुलनीय भंडार हैं। उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन पर पीएचडी की है। कल भी उन्होंने तीनों भाषाओं के काव्य सौंदर्य की चर्चा करके हम लोगों को उपकृत किया। प्रसाद, पंत, निराला से होते हुए यह चर्चा अज्ञेय के 'तार सप्तक' तक पहुंच गई। डॉ रामजी तिवारी ने अज्ञेय की चर्चित कविता 'सांप' की आधुनिक संदर्भ में अद्भुत व्याख्या की-

साँप !
तुम सभ्य तो हुए नहीं
नगर में बसना
भी तुम्हें नहीं आया।
एक बात पूछूँ- (उत्तर दोगे?)
तब कैसे सीखा डँसना-
विष कहाँ पाया?

डॉ रामजी तिवारी ने संस्कृत के प्रकांड विद्वान आनंदवर्धन के हवाले से बताया कि भारतीय काव्यशास्त्र में काव्य-सृजन के लिए तीन मुख्य हेतु माने गए हैं- प्रतिभा, प्रत्युत्पन्नमति और अभ्यास।  

प्रतिभा (जन्मजात शक्ति), व्युत्पत्ति (शास्त्र ज्ञान) और अभ्यास (निरंतर प्रयास) के मेल से उत्पन्न जो सौंदर्यमयी रचना रसानुभूति कराती है उसे काव्य कहा जाता है। प्रतिभा नए विचारों को जन्म देती है, व्युत्पत्ति उसे निखारती है और अभ्यास उसे परिष्कृत करता है जिससे कविता में प्रभावोत्पादकता (प्रत्युत्पन्नमति) और भावों की मार्मिक अभिव्यक्ति आती है।

मैंने डॉ तिवारी से आचार्य मम्मट का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि आचार्य मम्मट ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'काव्यप्रकाश' में काव्य के छः प्रयोजन बताए हैं- यश प्राप्ति, धन लाभ, व्यावहारिक ज्ञान, अमंगल का नाश, अलौकिक आनंद और कान्ता सम्मित मधुर उपदेश। 

"काव्यं यशसेऽर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतरक्षतये।
सद्यः परनिर्वृत्तये कान्तासम्मिततयोपदेशयुजे।"

हमारी गपशप के दौरान अकबर के नवरत्नों का भी ज़िक्र हुआ। डॉ तिवारी ने वह कथा सुनाई कि कैसे कवि गंग को हाथी के पैरों तले कुचलकर मौत की सज़ा दी गई थी। उन्होंने माफ़ी नहीं मांगी। अपने जीवन का आख़िरी कवित्त सुना कर विदा हुए-

चाह भई परमेश्वर को कवि गंग को लेन गणेश पठायो

कवि गंग के अच्छे मित्र थे रहीम। वे जरूरतमंदों को दान देते समय आँखें झुका लेते थे। कवि गंग ने रहीम से पूछा-

ऐसी देनी देन जू, कित सीखे हो सैन।
ज्यों-ज्यों कर ऊँचो करो, त्यों-त्यों नीचे नैन॥

इसका उत्तर रहीम ने अत्यंत विनम्रता से दिया-

देनहार कोई और है, देवत है दिन रैन।
लोग भरम हम पर करें, याते नीचे नैन॥ 



हिंदी और संस्कृत के अलावा डॉ रामजी तिवारी ने अंग्रेजी कवि वर्ड्सवर्थ, कॉलरीज और इलियट के भी रोचक प्रसंग सुनाए। अपनी सृजनात्मकता से इस गपशप ने हमारी सोच और सरोकार को कितना समृद्ध किया यह वर्णनातीत है। सुलतानपुर में डॉ रामजी तिवारी मेरे मोहल्ले शास्त्री नगर में मेरे पड़ोसी हैं। इसलिए हमारी गपशप का यह सिलसिला लगातार जारी रहता है। पिछली गपशप में डॉ धर्मपाल सिंह और प्रो कमलनयन पांडेय जी शामिल थे। आप भी पधारिए और सत्संग का फ़ायदा उठाइए।

आपका : देवमणि पांडेय मो : 98210 82126
(सुलतानपुर 16 फरवरी 2026)