कथाकार मनहर चौहान के साथ गपशप का आनंद
कथाकार मनहर चौहान बिल्कुल स्वस्थ और प्रसन्न हैं। पत्रकार रेणु शर्मा ने उनका ज़िक्र किया और शनिवार 9 मई 2026 को हमने उनसे मिलने का प्लान बना लिया। कथा पत्रिका 'सारिका' के सुनहरे दौर में चर्चित हुए 86 वर्ष के मनहर चौहान ने कुछ दिलचस्प अनुभव हमारे साथ साझा किये और हमारे साथ कई बार ज़ोरदार ठहाके भी लगाए।
तस्वीरें देखकर आप ख़ुद अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मनहर चौहान कितने स्वस्थ और प्रसन्न नज़र आ रहे हैं। मनहर जी ने हमारे साथ दही बड़ा, मिठाई, कचोरी और नमकीन खाने में कोई कोताही नहीं की। उनकी पत्नी लक्ष्मी चौहान एवं बेटी वंदना चौहान ने भी इस रोचक चर्चा का भरपूर लुत्फ़ उठाया।
दो साल पहले मनहर चौहान ने चित्रनगरी संवाद मंच में बिना काग़ज़ देखे कहानी पाठ किया था। उनकी कहानी #चैतू_और_चमेली चरित्र प्रधान कहानी थी। पुराने ज़माने में ठेकेदार मज़दूरों को कैसे ट्रेन के डिब्बे में भेड़ बकरियों की तरह ले जाते थे यह दृश्य विचलित कर देने वाला था। मनहर जी ने उस कार्यक्रम का ज़िक्र किया। मैंने कहा- आप अपनी एक कहानी दे दीजिए रेणु शर्मा उसका पाठ करेंगी। उन्होंने कहा- ए आई से लिखवा कर भेज दूंगा और फिर ठहाका लगाया।
लेखक, पत्रकार और कथाकार मनहर चौहान विशेष रूप से सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और मध्यम वर्ग के जीवन के इर्द-गिर्द बुनी गई कहानियों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने उपन्यास, कहानी और बाल साहित्य जैसी विभिन्न विधाओं में लेखन किया है। उनकी कहानियों में आम आदमी के संघर्ष और रिश्तों की जटिलताओं का बारीक चित्रण मिलता है।
मनहर चौहान साहित्य सृजन के साथ-साथ संपादन और पत्रकारीय गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं। 'दमख़म' पत्रिका के ज़रिए उन्होंने कई लेखकों को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे 'दमख़म' में मेरे फोटो के साथ मेरी ग़ज़ल प्रकाशित करना चाहते थे। उन्हें मेरा कोई फोटो पसंद नहीं आया। वे बोले- आप हमेशा कैमरे में क्यों झांकते हैं? मैं एक स्टूडियो में गया। उनके निर्देशानुसार फोटो खिंचाया तब उन्होंने ग़ज़ल छापी।
दो साल पहले मनहर चौहान ने मुझे अपना नया उपन्यास 'वध' भेंट किया था। रहस्य रोमांच से भरपूर इस उपन्यास के ज़रिए मनहर जी ने यह साबित किया है कि एक सामान्य इंसान के भीतर भी हिंसक और जटिल विचार जन्म ले सकते हैं। 'वध' की भाषा बहुत कसी हुई और प्रभावशाली है।
सत्तर के दशक में श्रीपत राय के सम्पादन में प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'कहानी' ने अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता का आयोजन किया था। मनहर चौहान की कहानी #घरघुसरा को उसमें प्रथम पुरस्कार मिला था। 'घरघुसरा' कहानी मध्यमवर्गीय समाज के उन किरदारों पर केंद्रित है जिन्हें अक्सर समाज 'अंतर्मुखी' या घरघुसरा कहकर पुकारता है। समाज किसी व्यक्ति की निजता और उसके स्वभाव को किस तरह परिभाषित करता है इस द्वंद्व को यह कहानी बहुत ख़ूबसूरती से उभारती है।
मनहर चौहान का मशहूर उपन्यास #अरे_ओमप्रकाश व्यवस्था, भ्रष्टाचार और आम आदमी की बेबसी पर चोट करता है। इसमें समाज की विसंगतियों और व्यवस्था के भीतर फंसे एक आम इंसान 'ओमप्रकाश' की छटपटाहट को दिखाया गया है। इसकी शैली में व्यंग्य और यथार्थ का गहरा पुट है।
मनहर चौहान ने प्रचुर मात्रा में #बाल_साहित्य का भी सृजन किया है। उनकी सबसे बड़ी ख़ूबी यह है कि वे मनोवैज्ञानिक गहराई के साथ-साथ बोलचाल की सरल भाषा का प्रयोग करते हैं जिससे पाठक किरदारों के साथ सीधा जुड़ाव महसूस करता है।
मनहर चौहान हमेशा कलमजीवी साहित्यकार रहे। कई सालों तक उन्होंने मुम्बई के दहिसर स्टेशन के पास अपना लेखन कार्यालय बनाया था। एक दौर में उन्होंने कई #जासूसी_उपन्यास भी लिखे जो काफी पसंद किये गए। उन्होंने गुजराती और मराठी कृतियों का अनुवाद भी किया। मराठी से हिन्दी में अनूदित उपन्यास 'अघोरियों के बीच' जनसत्ता सबरंग में धारावाहिक प्रकाशित होकर बहुचर्चित हुआ।
मनहर जी से गपशप में आनंद आया। उनसे मिलकर अच्छा लगा। हमारी दुआ है कि वे इसी तरह स्वस्थ और प्रसन्न रहें। हँसते मुस्कराते रहें और ठहाके लगाते रहें।
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आपका :
देवमणि पांडेय 98210 82126






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