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Thursday, March 24, 2011

इस ग़म का क्या करें हम



फ़िल्म ‘कहाँ हो तुम’ का मुहूर्त चित्र

बतौर गीतकार दिसम्बर 1999 में मेरी पहली फ़िल्म ‘कहाँ हो तुम’ का मुहूर्त हुआ था। इसमें समीर सोनी, सोनू सूद, शर्मन जोशी और इशिता अरुण की प्रमुख भूमिकाएं थीं। निर्देशक थे विजय कुमार और संगीत रजत ढोलकिया ने दिया था।

देवमणि पांडेय की दो ग़ज़लें

(1)


इस ग़म का क्या करें हम, तनहाई किससे बाँटें
जो भी मिली है तुमसे रुस्वाई किससे बाँटें

कोई नहीं जो समझे अश्कों की दास्तां को
हम इन समंदरों की गहराई किससे बाँटें

तेरी-मेरी ज़मीं तो हिस्सों में बँट गई है
ये दर्द की विरासत मेरे भाई किससे बाँटें

कटने को कट रही है ये ज़िंदगी हमारी
हर शाम पूछती है तनहाई किससे बाँटें

फिर ख़ुशनुमा है मौसम, फिर फूल खिल गए हैं
जो तुम नहीं तो महकी अँगनाई किससे बाँटें

(2)


ढली इस तरह शाम ढलते हुए
बुझे दिल चिराग़ों-से जलते हुए

कहाँ खो गए कुछ पता ही नहीं
मेरी आँख में ख़्वाब पलते हुए

कभी कम न होगी ग़मों की तपिश
ये कहते हैं आँसू उबलते हुए

बदलते हुए मौसमों की तरह
तुम्हें हमने देखा बदलते हुए

तुम्हें ज़िंदगी से सभी कुछ मिला
हमीं रह गए हाथ मलते हुए

मुझे साथ अपने बहा ले गईं
समंदर की मौजें मचलते हुए

3 comments:

Poorviya said...

मुझे साथ अपने बहा ले गईं
समंदर की मौजें मचलते हुए

jai baba banaras......

Navin C. Chaturvedi said...

तुम्हें ज़िंदगी से सभी कुछ मिला
हमीं रह गए हाथ मलते हुए

वाह बहुत खूब देव भाई

सुनील गज्जाणी said...

namaskaar !
behad umdaa sher hai , aananasd aaya padh .
shukariyaa !