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Wednesday, January 20, 2016

एक ही ज़मीन में देवमणि पांडेय की दो ग़ज़लें

जैन समाज के एक कार्यक्रम में देवमणि पांडेय (मुम्बई 2014)

एक ही ज़मीन में देवमणि पांडेय की दो ग़ज़लें

 (1)
क्यूँ हमारे दिल के अंदर झाँकता कोई नहीं
क्या किसी से अब हमारा वास्ता कोई नहीं

मुस्कराके तुम तो रुख़सत हो गए हमसे मगर
दिल पे क्या गुज़री हमारे जानता कोई नहीं

सोचता हूँ क्यूँ सभी को अजनबी लगता हूँ मैं
क्यूँ मु्झे मेरे सिवा पहचानता कोई नहीं

चंद वादों में सिमट कर रह गई है आशिक़ी
टूटकर अब क्यूँ किसी को चाहता कोई नहीं

एक ही कमरे में दोनों रह रहे हैं साथ-साथ
फिरभी उनके दिल जुदा हैं राब्ता कोई नहीं

मुस्कराकर उसने पूछा हम-सा देखा है कोई
हमने उससे कह दिया बेसाख़्ता कोई नहीं

मंदिरों में, मस्जिदों में, ढूँढते फिरते हैं लोग
वो छुपा बैठा है दिल में ढूँढता कोई नहीं

 (2)
कश्तियाँ मझधार में हैं नाख़ुदा कोई नहीं
अपनी हिम्मत के अलावा आसरा कोई नहीं

शोहरतों ने उस बुलंदी पर हमें पहुँचा दिया
अब जहाँ से लौटने का रास्ता कोई नहीं

जी रहे हैं किस तरह हम लोग अपनी ज़िदगी
जैसे दुनिया में किसी से वास्ता कोई नहीं

मिलके अपने दोस्तों से ख़ुश बहुत होते हैं लोग
पर किसी के दिल के अंदर झाँकता कोई नहीं

रफ़्ता रफ़्ता उम्र सारी कट गई अपनी यहाँ
फिर भी हमको इस शहर में जानता कोई नहीं

कुछ अधूरे ख़्वाब हमसे कर रहे हैं ये सवाल
जिंदगी से क्या हमारा राब्ता कोई नहीं

हमने पूछा ख़ुद के जैसा क्या कभी देखा कोई
मुस्कराकर उसने हमसे कह दिया- कोई नहीं



देवमणि पांडेय : 98210-82126
devmanipandey@gmail.com 




Thursday, January 14, 2016

किस नगर से आ रही हैं शोख़ बासंती हवाएँ



बसंत का गीत : देवमणि पाण्डेय

धूप का ओढ़े दुशाला और  महकाती दिशाएँ
किस नगर से आ रही हैं शोख़ बासंती हवाएँ

आम के यूँ बौर महके
भर गई मन में मिठास
फूल जूड़े ने सजाए
नैन में जागी है प्यास

कह रही कोयल चलो अब प्रेम का इक गीत गाएँ
किस नगर से आ रही हैं शोख़ बासंती हवाएँ

झूमती मदहोश होकर
खेत में गेहूँ की बाली
लाज का पहरा है मुख पर
प्यार की छलकी है लाली

धड़कनें मद्धम सुरों में दे रहीं किसको सदाएँ
किस नगर से आ रही हैं शोख़ बासंती हवाएँ  

ओढ़कर पीली चुनरिया
आँख में सपना सजाए
कर रही सरसों शिकायत
दिन ढला सजना न आए

साँझ बोली चल सखी हम आस का दीपक जलाएँ
किस नगर से आ रही हैं शोख़ बासंती हवाएँ



देवमणि पाण्डेय : M : 98210-82126,   devmanipandey@gmail.com