Recent Posts

Thursday, April 10, 2014

क्या-क्या हुआ गाँव से ग़ायब


 
विश्व हिंदी अकादमी के महफ़िल-ए-मुशाइरा में शाइरा दीप्ति मिश्र, प्रज्ञा विकास, लता हया, शाइर देवमणि पांडेय और माइक पर संस्थाध्यक्ष केशव राय (मुम्बई 14.9.2013) 


क्या-क्या हुआ गाँव से ग़ायब

सावन की पुरवइया ग़ायब
पोखर,ताल-तलइया ग़ायब

कट गए सारे पेड़ गाँव के
कोयल औ' गोरइया ग़ायब

कच्चे घर तो पक्के बन गए
हर घर से अँगनइया ग़ायब

सोहर,कजरी,फगुआ भूले
बिरहा,नाच-नचइया ग़ायब

नोट निकलते ए टी एम से
पैसा, आना, पइया ग़ायब

दरवाज़े पर कार खड़ी है
बैल-भैंस और गइया ग़ायब

सुबह हुई तो चाय की चुस्की
चना-चबेना, लइया ग़ायब

भाभी देख रही हैं रस्ता
शहर गए थे, भइया ग़ायब


देवमणि पांडेय : 98210-82126
devmanipandey@gmail.com