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Tuesday, December 8, 2015

सोहनलाल द्विवेदी की कविता : लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती

सोहनलाल द्विवेदी की कविता है - 
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती I 
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती II

ये कविता किसकी है ? इसे महाकवि निराला की रचना भी कहा गया और इंटरनेट पर डॉ.हरिवंशराय बच्चन की रचना के रूप में भी प्रचारित किया गया। स्वयं अमिताभ बच्चन ने इसे अपने 'बाबूजी' की रचना बताया है और स्वयं इसका पाठ भी किया है। इस लिए काफ़ी लोग मानते हैं कि यह उन्हीं की रचना है। मगर किसी को ये मालूम नहीं है कि ये कविता डॉ.हरिवंशराय बच्चन के किस काव्य संकलन में शामिल है। जहाँ तक मेरी जानकारी है ये कविता बच्चन साहब के किसी भी संकलन में शामिल नहीं और इसकी शैली भी उनसे मेल नहीं खाती।

फ़िलहाल वर्ष 2007-2008 से यह रचना महाराष्ट्र के छठी कक्षा के पाठ्यक्रम में बिना रचनाकार के नाम के प्रकाशित है। अगर ये कविता डॉ.हरिवंशराय बच्चन की है तो आदरणीय अमिताभ बच्चन महाराष्ट्र सरकार से यह माँग क्यों नहीं करते कि इसके साथ डॉ.हरिवंशराय बच्चन का नाम जोड़ दिया जाए।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सच्चाई ये है कि इसके वास्तविक रचनाकार का नाम सोहनलाल द्विवेदी है। मैंने मुम्बई वि.वि.के सेवानिवृत्त हिंदी विभागाध्यक्ष एवं महाराष्ट्र पाठ्य पुस्तक समिति के अध्यक्ष डॉ.रामजी तिवारी से पिछले साल फोन पर सम्पर्क किया था। उन्होंने बताया था कि लगभग 20 साल पहले श्री अशोक कुमार शुक्ल नामक सदस्य ने सोहनलाल द्विवेदी की यह कविता वर्धा पाठ्यपुस्तक समिति को लाकर दी थी। ये शायद किसी पत्रिका में प्रकाशित थी। तब यह कविता छ्ठी या सातवीं के पाठ्यक्रम में शामिल की गई थी। समिति के रिकार्ड में रचनाकार के रूप में सोहनलाल द्विवेदी का नाम तो दर्ज है मगर एक रिमार्क लगा है कि 'पता अनुपलब्ध है।' इसके कारण कभी इसकी रॉयल्टी नहीं भेजी गई। कहीं यह चर्चा भी हुई थी कि सोहनलाल द्विवेदी इसे काव्य-मंचों पर पढ़ते थे। हैरत की बात यह है कि अब इसके रचनाकार का नाम क्यों हटा दिया गया।

कानपुर के पास बिंदकी (ज़िला फ़तेहपुर) के मूल निवासी सोहनलाल द्विवेदी का नाम ऐसे कवियों में शुमार किया जाता है जिन्होंने एक तरफ़ तो आज़ादी के आंदोलन में सक्रिय भागीदरी की और दूसरी तरफ देश और समाज को दिशा देने वाली प्रेरक कविताएं भी लिखीं। मुम्बई में चाटे क्लासेस ने अपने विज्ञापनों में अनेक बार इस कविता को प्रकाशित किया मगर कभी भी उन्होंने कवि का नाम नहीं दिया। मैंने गाँधी को नहीं मारा फ़िल्म में भी इस कविता का सार्थक फ़िल्मांकन किया गया। अगर हम इस कविता के साथ सोहनलाल द्विवेदी का नाम जोड़ सकें तो यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

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प्रिय दोस्तो!
ख़ुशी की बात है कि मेरी 4 दिसम्बर 2015 की FB POST के सिलसिले में स्वयं अमिताभ बच्चनजी ने मान लिया कि ''लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती...'' कविता उनके बाबूजी की नहीं बल्कि सोहनलाल द्विवेदी की है। उन्हें बहुत बहुत धन्यवाद।

FB 1169 -एक बात आज स्पष्ट हो गयी
ये जो कविता है
'कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती '
ये कविता बाबूजी की लिखित नहीं है
इस के रचयिता हैं
सोहन लाल द्विवेदी ....
कृपया इस कविता को बाबूजी, डॉ हरिवंश राय बच्चन के नाम पे न दें ... ये उन्होंने नहीं लिखी है



लीजिए पेश है सोहनलाल द्विवेदी की पूरी कविता

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
…….

आपका : देवमणि पांडेय (+91 98210 82126)






Wednesday, May 20, 2015

कवि देवमणि पाण्डेय को त्रिसुगंधि साहित्य रत्न सम्मान



त्रिसुगंधि शिवचंद ओझा ओसियां स्मृति सम्मान समारोह 

त्रिसुगंधि साहित्य, कला एवं संस्कृति संस्थान पाली राजस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्री शिवचंद ओझा ओसियां स्मृति सम्मान समारोह एवं दो दिवसीय राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मलेन का 7 मई 2014 को पिण्डवाडा, जिला सिरोही, राजस्थान में  भव्य आगाज़ हुआ । उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि थे वरिष्ठ साहित्यकार एवं राजस्थान उच्चतर न्यायिक सेवा से सेवानिवृत मुरलीधर वैष्णव साहब। देहरादून से पधारे जाने-माने गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथि थे दुनिया इन दिनों (भोपाल) के प्रधान संपादक-साहित्यकार डॉ.सुधीर सक्सेना, साहित्यकार सुरेखा शर्मा (हरियाणा) व विश्वगाथा के संपादक-लेखक पंकज त्रिवेदी (गुजरात), और प्रकाश कोठारी (जलगांव)।  कार्यक्रम की शु्रूआत आदर्श विधामंदिर स्कूल वनवासी कल्याण परिषद की छात्राओं द्वारा माँ सरस्वती वंदना से हुई। तत्पश्चात संस्था अध्यक्ष आशा पाण्डेय ओझा द्वारा विषय प्रवेश व स्वागत उद्बोधन के साथ ही इसी स्कूल की छात्राओं ने राजस्थानी लोक गीत" मोरियो रे झट चौमासो लाग्यो" पर शानदार नृत्य की प्रस्तुती दी। भीलवाड़ा राजस्थान से पधारे जाने-माने कवि प्रह्लाद पारिक ने इस सत्र का शानदार संचालन किया।

कार्यक्रम का  दूसरा  सत्र सांय 6 बजे प्रारम्भ हुआ। आशा पाण्डेय ओझा आशा  के काव्य संग्रह वक़्त की शाख़ सेका विमोचन गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ  मिश्र एवं समारोह अध्यक्ष वरिष्ठ बाल साहित्यकार डॉ. गोविन्द शर्मा संगरिया ने किया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विमला भंडारी (सलूम्बर), वरिष्ठ साहित्यकार एवं राजस्थानी व हिंदी के समान रूप से लेखन करने वाले डॉ. रवि पुरोहित (बीकानेर), वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह (राष्ट्रीय सहारा दिल्ली), प्रकाश दीवान (दिल्ली),साहित्यकार मोनिका  गौड़ (बीकानेर), साहित्यकार दिनेश माली (उड़ीसा), ने पुस्तक पर अपने विचार प्रस्तुत किये । इसी सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार व नवगीत के सशक्त हस्ताक्षर बुद्धिनाथ मिश्र जी का साहित्य में उनके समग्र योगदान के लिए संस्था द्वारा अभिनंदन किया गया। बांसवाडा (राजस्थान) के जाने-माने कवि साहित्यकार डॉ. सतीश आचार्य ने मंच  संचालन किया।

रात 9 बजे काव्य गोष्ठी  व मुशायरे का आगाज़ हुआ मुम्बई से पधारे फिल्म गीतकार व जाने-माने शायर देवमणि पाण्डेय साहब के मुख्य आतिथ्य  में। सुपरिचित  कवि दिनेश सिंदल (जोधपुर) अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथि थे पटियाला पंजाब से पधारे शायर सागर सूद। कवि प्रहलाद पारीक (भीलवाडा), कवि डॉ.सतीश आचार्य (बांसवाडा), सोम प्रसाद साहिल (शिवगंज), कवि विवेक पारीक (झूंझनू), अब्दुल समद राही (सोजत), समी शम्स वारसी (आबूरोड) आदि जाने-माने कवियों व शायरों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुती देकर रात दो बजे तक श्रोताओं को बांधे रखा। कार्यक्रम में नवगीत के सुपरिचित हस्ताक्षर डॉ.बुद्धिनाथ मिश्र के गीतों ने इतनी मिठास घोली की श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। डॉ.राम अकेला (पीपाड़) ने अद्भुत संचालन से सबका मन मोह लिया।  




कार्यक्रम के दूसरे दिन आठ मई को  सुबह 9 बजे पहले सत्र में समकालीन कविता में स्त्री विमर्श विषय पर चर्चा हुई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जेल अधीक्षक व लेखिका प्रीता भार्गव थी। कहानीकार माधव नागदा, साहित्यकार डॉ.विमला भंडारी, और डॉ.नवीन नंदवाना ने चर्चा में भाग लिया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.सुधीर सक्सेना ने अध्यक्षता की। संचालन किया कवि प्रहलाद पारीक ने।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में समकालीन कहानी में आंचलिकता का प्रभाव विषय पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि लेखक पंकज त्रिवेदी। जाने-माने कहानीकार दिनेश पंचाल ने अध्यक्षता की। डॉ. दिनेश चारण और रीना मेनारिया ने प्रमुख वक्ता के तौर पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन कवयित्री शकुंतला सरूपरिया ने किया।

अंतिम सत्र में सम्मान समारोह हुआ। श्री शिवचंद ओझा साहित्य शिरोमणि पुरस्कार डॉ.नन्द भरद्वाज को उनके समग्र लेखन व साहित्य सेवाओं के लिए प्रदान किया गया।  कला क्षेत्र का कला शिरोमणि सम्मान अब तक दस से अधिक देशों में व हिंदुस्तान भर में अपने कथक नृत्य की प्रस्तुती दे चुकीं ग्वालियर की नृत्यांगना डॉ समीक्षा शर्मा को प्रदान किया गया। समग्र लेखन एवं साहित्य सेवाओं के लिए सुधीर सक्सेना (भोपाल), देवमणि पाण्डेय (मुम्बई), दिनेश माली (उड़ीसा), सुरेखा शर्मा (गुडगाँव), पंकज  त्रिवेदी (गुजरात), सागर सूद (पटियाला,पंजाब), और  मोनिका गौड़ (बीकानेर) को त्रिसुगंधि साहित्य रत्न सम्मान प्रदान किया गया ।  कला एवं संस्कृति में विशिष्ट योगदान के लिए डॉ.महासिंह पूनिया (कुरुक्षेत्र हरियाणा) को कला व संस्कृति रत्न सम्मान प्रदान किया गया ।  डॉ.नवीन नंदवाना (उदयपुर), डॉ.शकुंतला सरूपरिया (उदयपुर) व डॉ.दिनेश चारण (आबू रोड) व आदर्श विधा मंदिर विद्यालय वनवासी कल्याण परिषद पिण्डवाडा का अभिनन्दन किया गया। सारे अतिथियों व प्रतिभागियों को उपरणा,स्मृति चिन्ह व प्रमाण पत्र प्रदान किये गए। सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि थे डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र व अध्यक्षता की वरिष्ठ साहित्यकार मुरलीधर वैष्णव ने। कार्यक्रम का संचालन किया कवि विवेक पारीक ने। अंत में संस्था अध्यक्ष आशा पाण्डेय ओझा ने सभी पधारे हुए साहित्यकारों व अतिथियों का आभार व्यक्त किया।  

प्रस्तुति : विवेक पारीक

Friday, February 27, 2015

ख़ुशबुओं की शाल ओढ़े रुत सुहानी मिल गई


यात्री रंग समूह के खुलामंच-6 में शायर देवमणि पांडेय की शायरी का लुत्फ़ उठाते वरिष्ठ रंगकर्मी ओम कटारे और अशोक शर्मा (मुम्बई 8-2-2015)


देवमणि पांडेय की ग़ज़ल

ख़ुशबुओं की शाल ओढ़े रुत सुहानी मिल गई 
दिल में ठहरे एक दरिया को रवानी मिल गई 

कुछ परिंदों ने बनाए आशियाने शाख़ पर
गाँव के बूढ़े शजर को फिर जवानी मिल गई

आ गए बादल ज़मीं पर सुनके मिट्टी की सदा
सूखती फ़सलों को पल में ज़िंदगानी मिल गई 

घर से निकला है पहनकर जिस्म ख़ुशबू का लिबास
लग रहा है गोया इसको रातरानी मिल गई 

इक पुरानी डायरी में मिल गया सूखा गुलाब
खो गई थी जो मुहब्बत की निशानी मिल गई

जी ये चाहे उम्र भर मैं उसको ही पढ़ता रहूँ
याद की खिड़की पे बैठी इक कहानी मिल गई 

माँ की इक उँगली पकड़कर हँस रहा बचपन मेरा
एक अलबम में वही फोटो पुरानी मिल गई

देवमणि पांडेय : 98210-82126
devmanipandey@gmail.com 


Monday, February 23, 2015

पढ़लिख कर क्या करेंगे आख़िर राम-श्याम-रहमान वग़ैरह

यात्री रंग समूह के खुलामंच-6 में कला, साहित्य और संगीत से जुड़े कलाकार : फ़िल्म निर्देशक अदीप टंडन, वरिष्ठ रंगकर्मी ओम कटारे, समाज सेवी विश्वनाथ शर्मा, शायर देवमणि पांडेय, कवि निलय उपाध्याय, रंगकर्मी धर्मेंद्र पांडेय, गायक विनोद गवार, संगीतकार गायक आशुतोष सिंह, गायक नवतेज, कवि बसंत आर्य, गीतकार क़ैस जौनपुरी, कवयित्री स्वाति, अभिनेत्री ऐश्वर्या, रंगकर्मी अशोक शर्मा, कवि पंकज दुबे और अभिनेता विजय गायकवाड़ आदि (मुम्बई 8.2.2015)


देवमणि पांडेय की ग़ज़ल 

 

पढ़लिख कर क्या करेंगे आख़िर राम-श्याम-रहमान वग़ैरह 

ये भी इक दिन बन जाएंगे चपरासी, दरबान वग़ैरह

रोज़ी-रोटी के चक्कर में हमने ख़ुद को गँवा दिया
कहाँ गया अपना वो तेवर, ख़ुद्दारी, पहचान वग़ैरह

दूर-दूर तक आदर्शों से रिश्ता नहीं सियासत का 
नज़र कहाँ से आएं इनमें सच्चाई, ईमान वग़ैरह
 

दौलत, शोहरत और प्रतिष्ठा सब कुछ हासिल है फिर भी
किसे पता क्या ढूँढ रहे हैं साहिब और धनवान वग़ैरह

फ़िल्में अगर नहीं चलतीं तो सोचो इनका क्या होता 
काट रहे हैं चाँदी हर दिन अक्षय और सलमान वग़ैरह
  

हम हैं सीधे-सादे इंसां कोई ऐब नहीं हममें 
कभी-कभी बस ले लेते हैं सिगरेट,विसकी,पान वग़ैरह

कम से कम इतवार के दिन तो अपने घर पे रहा करो  
बिना बताए आ जाते हैं यार-दोस्त, मेहमान वग़ैरह


देवमणि पांडेय : 98210-82126
devmanipandey@gmail.com