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Tuesday, January 25, 2011

दोना पावला की प्रेम कथा


गोवा के पणजी (पंजिम) इलाक़े में है दोना पावला बीच।यहाँ एक छोटी सी पहाड़ी है जिसे दोना पावला प्वाइंट कहा जाता है। 22 जनवरी 2011 को इस प्वाइंट पर खड़ा होकर मैं सोच रहा था कि दोना और पावला तो एक ही समुदाय के थे फिर क्यों दुनिया इन दो दिलों के बीच में दीवार बन गई और इन्हें इस पहाड़ी से कूदकर अपनी जान देकर अपनी मुहब्बत का सबूत देना पड़ा। कहा जाता है कि फ़िल्म ‘एक दूजे के लिए’ इसी प्रेम कथा से प्रेरणा लेकर बनाई गई थी।

23 जनवरी 2011 गोवा के कंडोलियम बीच पर हाई टाइड के समय दोस्तों के साथ नहाते हुए ये महसूस किया कि अगर आप सीना तानकर लहरों का सामना करेंगे तो समंदर आपको ज़ोर से पटक देगा।बेहतर है आप अपनी पीठ पर लहरों को सवार होने दीजिए और किनारे की तरफ़ ज़रा सा सिर झुका दीजिए।लहरें आपको थपथपाकर वापस लौट जाएंगी।

21 जनवरी 2011 रात 12 बजे गोवा के बागा बीच पर ओसियानिक शैक (सी फेस रेस्तराँ) पर डिनर करते हुए हमने वेटर से पूछा-तुम्हारी ड्यूटी कितने बजे तक है।उसने बताया-मेरी ड्यूटी सुबह 4.30 बजे तक है।मगर 4.30 बजे ये सामने दिख रहा टीटो पब बंद होता है तो सारे लड़के-लड़कियाँ इधर ही आ जाते हैं।फिर उन्हें खिलाने- पिलाने में एक घंटे और निकल जाते हैं तो मैं सुबह 6.00 बजे ही यहाँ से निकल पाता हूँ।इस तरह गोवा रात भर जागता है और दिन में सोता है।

ओल्ड गोवा में म्यूज़ियम के सामने है गोल्डेन चर्च।इसमें एक ममी है।बताते हैं कि यह 600 साल पुरानी है।इस वक़्त गोवा में कैसिनो की बहार दिखाई देती है।समंदर के अंदर जहाज पर भी कैसिनो की रंगीन दुनिया आबाद रहती है।लोग लाखों रूपये लेकर इनमें प्रवेश करते हैं और प्रायः ख़ाली हाथ वापस आते हैं। गोवा की प्राचीन नदी का नाम है माण्डवी।कभी यह नदी अपनी पवित्रता और लोक संस्कृति के लिए मशहूर थी। अब इसके सीने पर तैरती हुई नौकाओं पर रात-रात भर जुआ खेला जाता है। लोक नृत्यों की जगह वेस्टर्न डांस ने ले ली है।यहाँ के प्रतिष्ठित कवि यूसुफ शेख़ ने अपनी मातृभाषा कोंकणी में माण्डवी नदी पर एक मर्मस्पर्शी कविता लिखी है।इसका हिंदी अनुवाद आपके लिए प्रस्तुत है।



मांडवी के तट पर चलते चलते

मांडवी के तट पर चलते-चलते
नज़रों के आगे आए हैं कुछ चौंकाने वाले चित्र
और साक्षी बना हूँ मैं भी इन विचित्र हालातों का

और साक्षी बना हूँ मैं भी इन विचित्र हालातों का
थम गया दिमाग़ और दिन से ये आवाज़ आई-

जिस युगांत में तुम जन्मे हो, युग है बहुत महान
ऐ भाग्यवान इंसान ! अपने कर्तव्यों को जान..............

यह जीवन तो सुविधाओं से भरा हुआ है
इस युग में बेहतर बनने की आज़ादी है
अपनी सीमित सोच हटाकर
आस-पास को अच्छा रखकर
देना होगा इस पर ध्यान -
ऐ भाग्यवान इंसान ! अपने कर्तव्यों को जान..............

हवा से ज़्यादा तेजी से तुम भाग रहे हो
अधिकारों पर कब्ज़ा करते
और स्वार्थ को गले लगाते
आज सितारों जैसे तुम तो चमक रहे हो
सूरज की रोशनी में दिखते हैं जो
उन लोगों की क्या हालत है ! इसे कभी तुम देख न पाए


दुर्दशा.........
चित्र दुर्दशा का तुमने तो उल्टा करके ही देखा है
इसी लिए तो तुम्हें लगा कि यहाँ स्वर्ग-सुख छाया है
मगर तुम्हारी स्वर्गभूमि पर
महँगाई निर्धन जनता को चिढ़ा रही है
पीड़ित लोगों को भी पीड़ा सता रही है
मगर तुम्हारी बात ही क्या है
तुम तो करते हो हर दिन अमृत स्नान
ऐ भाग्यवान इंसान ! अपने कर्तव्यों को जान..............

मांडवी की तुमने ऐसी दशा बदल दी
गोद में उसकी नहीं रहे वो गीत सुरीले
गाँव-गाँव में लोग सभी जिनको गाते थे
जो सदियों से हम सबको बहलाते थे

आम आदमी को तो मांडवी लगी चिढ़ाने
पावन जल में खेल पाप के लगी दिखाने
आज मांडवी सजी हुई है
बन गई है कितनी अमीर यह
मगर कहीं से ख़बर न आती
अपनी कमाई किसे खिलाती

गांव गांव में घूमट ढोल बजाने वाले

खोए-खोए दिखने लगे हैं
आज अस्मिता के रखवाले भी
थके-थके से लगने लगे हैं
पुरखों की ज़मीन हाथों से निकल रही है
कैसे बेघर दिन बीतेंगे
घर की चिंता सता रही है

खोने से पहले ये जवानी सोच-समझ ले
बुरे ख़यालों को अपने तू अभी बदल दे
पता है तुझको इस दुनिया में
हम हैं कुछ दिन के मेहमान
ऐ भाग्यवान इंसान ! अपने कर्तव्यों को जान..............

महान युग के धनी हैं हम सब
रगों में सबकी भरे हुए हैं गुण महानता के ही सारे
छोड़ मोतियों की दौलत को
भटक रहे हैं मारे-मारे

इस युग की इस तेज़ दौड़ में
भाग रहें हैं दिन तेजी से
हमें बदलनी दिशा दौड़ की
थके हुए सब इंसानों को
सुख के झूले में है झुलाना
याद रखो, ये प्राण त्याग कर
इक दिन हम सबको है जाना
ऐ भाग्यवान इंसान ! अपने कर्तव्यों को जान..............

Saturday, January 1, 2011

हम आईने हैं दिखाएंगे दाग़ चेहरों के


(बाएं से दाएं) मरुधरा के उपाध्यक्ष रामस्वरूप अग्रवाल, सकाल टाइम्स के विशेष संवाददाता मृत्युंजय बोस. जनसंपर्ककर्मी संजीव निगम , जी न्यूज के प्रोड्यूसर सुभाष दवे, वरिष्ठ पत्रकार-कवि और नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव, आकाशवाणी के सेंट्रल सेल्स डायरेक्टर तथा वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट मीडियाकार मुकेश शर्मा, मरुधरा के अध्यक्ष सुरेन्द्र गाडिया, नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी, कवि-गीतकार देवमणि पाण्डेय

पत्रकारिता पर आधारित पाँच किताबों का लोकार्पण

मुम्बई की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था मरुधरा और सौम्य प्रकाशन द्वारा मुम्बई के प्रेसक्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकारिता पर आधारित पाँच किताबों का लोकार्पण आकाशवाणी के सेंट्रल सेल्स डायरेक्टर तथा वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट मीडियाकार मुकेश शर्मा ने किया। इन किताबों के नाम हैं- बिजनेस जर्नलिज्म, जनसंपर्क, फील्ड रिपोर्टिंग गाइड, स्पेशल रिपोर्ट और फिल्मी स्कूप। इन किताबों पर अपनी राय का इज़हार करते हुए उन्होंने कहा, 'पत्रकारिता किताबें पढ़कर नहीं सीखी जा सकती। लेकिन मीडिया पर इस तरह की सारगर्भित और व्यावहारिक किताबें नये तथा युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन कर सकती हैं। ये उन्हें ऐसे मानकों के अक्स दिखा सकती हैं, जिनसे पत्रकारिता जनता की नज़रों में पवित्र और विश्वसनीय बनती है।


प्रेसक्लब का सभागार युवा पत्रकारों से इस क़दर खचाखच भरा था कि कई वरिष्ठ पत्रकारों को बैठने के लिए सीटें कम पड़ गईं। मुकेश शर्मा ने युवा पीढ़ी की तारीफ़ करते हुए कहा, 'आज के युवा पत्रकार स्मार्ट हैं। उनके पास सूचनाओं के तमाम साधन मौजूद हैं। सूचनाएं प्राप्त करने में उन्हें कोई बाधा नहीं है। बस, जरूरत इस बात की है कि उन्हें इन सूचनाओं का अच्छी तरह से, जनोपयोगी रूप से इस्तेमाल करना आना चाहिए। मीडिया के सामने चाहे जो भी संकट आये, युवा पत्रकारों की अगर तैयारी अच्छी है, तो वे उससे पार पा सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन कवि-गीतकार देवमणि पांडेय ने किया। उन्होंने शुरुआत में इन किताबों के लेखकों का परिचय कराया और एक शेर के ज़रिए इनके लेखन कौशल की तारीफ़ की-

कुछ भी लिखना सरल नहीं है पूछो हम फ़नकारों से
हम सब लोहा काट रहे हैं का़गज़ की तलवरों से !


कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार-कवि और नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव ने आज की पत्रकारिता पर विचार व्यक्त करते हुए कहा- ‘आज फिर मिशनरी पत्रकारिता की जरूरत है। कोई भी अखबारी तंत्र या बाजार पत्रकारों से कुछ खास खबरें लाने या न लाने को कह सकता है, पर जन सरोकारों से जुड़ी सीधी-सच्ची खबरें लाने से कोई मना नहीं करता’। उन्होंने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कहा, 'आज 24 घंटे के ख़बरिया चैनलों पर खबरें कितने घंटे आती हैं? जब भी टीवी खोलो, इन चैनलों पर राजू के चुटकुले, शीला की जवानी और बिग बॉस की कहानी ही दिखती है। क्या ये खबरें हैं? न्यूज चैनल ये सब परोसकर इंटरटेनमेंट चैनलों में बदल गये हैं। ख़बरों के लिए दूरदर्शन लगाना पड़ता है। बेशक उसकी खबरों में सरकारी पुट होता है, पर वे ख़बरें तो होती हैं। मरहूम शायर क़ैसर-उल-जाफ़री के एक शेर के ज़रिए विश्वनाथ जी ने युवा पीढ़ी को पत्रकारिता के धर्म की याद दिलाई-

हम आईने हैं दिखाएंगे दाग़ चेहरों के
जिसे ख़राब लगे सामने से हट जाए!


श्रोता समुदाय में अगली पंक्ति में (बाएं से दाएं)-अमर उजाला के ब्यूरो प्रमुख हरि मृदुल, सौम्य प्रकाशन की निदेशक रीना त्यागी, अमर उजाला के एसोसिएट एडीटर सुमंत मिश्र और नवभारत टाइम्स मुम्बई की उपसम्पादक कंचन श्रीवास्तव।

जी न्यूज के प्रोड्यूसर सुभाष दवे ने अपनी किताब ‘बिजनेस जर्नलिज्म’ का परिचय देते हुए कहा, 'यह एक नीरस और शुष्क विषय माना जाता है। लेकिन मैंने इसे पंचतंत्र की कहानियों की तरह एक कहानी के रूप में पेश करके सरस बनाने की कोशिश की हैं’।

वरिष्ठ जनसंपर्ककर्मी संजीव निगम ने अपनी किताब ‘जनसंपर्क’ का परिचय देते हुए कहा, 'आज जीवन के हर क्षेत्र में जनसंपर्क की जरूरत है। वह जनसंपर्क कैसा हो, किस तरह किया जाये, उसके टूल्स क्या हों, इन सभी का विवरण मैंने दिया। और अनेक केस स्टडी के साथ व्यावहारिक तरीके से दिया है।

सकाल टाइम्स के विशेष संवाददाता मृत्युंजय बोस ने अपनी किताब ‘फील्ड रिपोर्टिंग गाइड’ के बारे में बताया, 'यह युवा पत्रकारों के लिए एक मैन्युअल के रूप में है। रिपोर्टिंग करते समय ध्यान में रखी जाने वाली बातों को तो मैंने बताया ही है, तरह-तरह की खबरों के लिखने की शैली के उदाहरण भी दिये हैं।
नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी ने अपनी दो किताबें ‘स्पेशल रिपोर्ट’ और ‘फिल्मी स्कूप’ का परिचय दिया।

‘स्पेशल रिपोर्ट’ में जावेद इकबाल (फ्रीलांसर), जितेंद्र दीक्षित (स्टार न्यूज) मनोज जोशी (ए 2 जेड चैनल), नीता कोल्हाटकर (डीएनए), प्रबल प्रताप सिंह (आईबीएन 7), प्रभात शुंगलू (आईबीएन 7), प्रकाश दुबे (दैनिक भास्कर), स्वर्गीय प्रमोद भागवत (महाराष्ट्र टाइम्स), रामबहादुर राय (प्रथम प्रवक्ता के पूर्व संपादक), रवीश कुमार (एनडीटीवी), रवि शंकर रवि (नई दुनिया), शेखर देशमुख (फ्रीलांसर) और उमाशंकर सिंह (एनडीटीवी) के करियर की बेहतरीन रिपोर्ट हैं।

‘फिल्मी स्कूप’ में चंद्रकांत शिंदे (नई दुनिया), इम्तियाज अजीम (राष्ट्रीय सहारा), रूपेश कुमार गुप्ता (जी न्यूज), संदीप सिंह (महुआ), शिवानी त्रिवेदी (स्टार न्यूज), सुमंत मिश्र (अमर उजाला), विद्योत्तमा शर्मा, (बॉम्बे टाइम्स की पूर्व असिस्टेंट एडिटर) और विनोद तिवारी (फिल्मफेयर के पूर्व संपादक) के कैरियर की अनोखी एक्सक्लूसिव स्टोरीज हैं।

मरुधरा के अध्यक्ष सुरेन्द्र गाडिया ने मुख्य अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट किया। संस्था के उपाध्यक्ष रामस्वरूप अग्रवाल व महामंत्री राकेश मोरारका ने लेखकों का स्वागत किया। सौम्य प्रकाशन की निदेशक रीना त्यागी ने पुष्पगुच्छ देकर इन पाँच पुस्तकों के कवर डिज़ाइनर संजय खडपे और शिव पाण्डेय का सम्मान किया तथा सबके प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मुम्बई के कई गणमान्य पत्रकार व लेखक मौजूद थे। मुम्बई में यह आयोजन शुक्रवार 24 दिसम्बर 2010 की शाम को सम्पन्न हुआ।