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शनिवार, 1 जनवरी 2011

हिंदी पत्रकारिता पर पाँच किताबों का लोकार्पण


(बाएं से दाएं) मरुधरा के उपाध्यक्ष रामस्वरूप अग्रवाल, सकाल टाइम्स के विशेष संवाददाता मृत्युंजय बोस. जनसंपर्ककर्मी संजीव निगम , जी न्यूज के प्रोड्यूसर सुभाष दवे, वरिष्ठ पत्रकार-कवि और नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव, आकाशवाणी के सेंट्रल सेल्स डायरेक्टर तथा वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट मीडियाकार मुकेश शर्मा, मरुधरा के अध्यक्ष सुरेन्द्र गाडिया, नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी, कवि-गीतकार देवमणि पाण्डेय

पत्रकारिता पर आधारित पाँच किताबों का लोकार्पण

मुम्बई की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था मरुधरा और सौम्य प्रकाशन द्वारा मुम्बई के प्रेसक्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकारिता पर आधारित पाँच किताबों का लोकार्पण आकाशवाणी के सेंट्रल सेल्स डायरेक्टर तथा वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट मीडियाकार मुकेश शर्मा ने किया। इन किताबों के नाम हैं- बिजनेस जर्नलिज्म, जनसंपर्क, फील्ड रिपोर्टिंग गाइड, स्पेशल रिपोर्ट और फिल्मी स्कूप। इन किताबों पर अपनी राय का इज़हार करते हुए उन्होंने कहा, 'पत्रकारिता किताबें पढ़कर नहीं सीखी जा सकती। लेकिन मीडिया पर इस तरह की सारगर्भित और व्यावहारिक किताबें नये तथा युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन कर सकती हैं। ये उन्हें ऐसे मानकों के अक्स दिखा सकती हैं, जिनसे पत्रकारिता जनता की नज़रों में पवित्र और विश्वसनीय बनती है।

प्रेसक्लब का सभागार युवा पत्रकारों से इस क़दर खचाखच भरा था कि कई वरिष्ठ पत्रकारों को बैठने के लिए सीटें कम पड़ गईं। मुकेश शर्मा ने युवा पीढ़ी की तारीफ़ करते हुए कहा, 'आज के युवा पत्रकार स्मार्ट हैं। उनके पास सूचनाओं के तमाम साधन मौजूद हैं। सूचनाएं प्राप्त करने में उन्हें कोई बाधा नहीं है। बस, जरूरत इस बात की है कि उन्हें इन सूचनाओं का अच्छी तरह से, जनोपयोगी रूप से इस्तेमाल करना आना चाहिए। मीडिया के सामने चाहे जो भी संकट आये, युवा पत्रकारों की अगर तैयारी अच्छी है, तो वे उससे पार पा सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन कवि-गीतकार देवमणि पांडेय ने किया। उन्होंने शुरुआत में इन किताबों के लेखकों का परिचय कराया और एक शेर के ज़रिए इनके लेखन कौशल की तारीफ़ की-

कुछ भी लिखना सरल नहीं है पूछो हम फ़नकारों से
हम सब लोहा काट रहे हैं का़गज़ की तलवरों से !


कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार-कवि और नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव ने आज की पत्रकारिता पर विचार व्यक्त करते हुए कहा- ‘आज फिर मिशनरी पत्रकारिता की जरूरत है। कोई भी अखबारी तंत्र या बाजार पत्रकारों से कुछ खास खबरें लाने या न लाने को कह सकता है, पर जन सरोकारों से जुड़ी सीधी-सच्ची खबरें लाने से कोई मना नहीं करता’। उन्होंने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कहा, 'आज 24 घंटे के ख़बरिया चैनलों पर खबरें कितने घंटे आती हैं? जब भी टीवी खोलो, इन चैनलों पर राजू के चुटकुले, शीला की जवानी और बिग बॉस की कहानी ही दिखती है। क्या ये खबरें हैं? न्यूज चैनल ये सब परोसकर इंटरटेनमेंट चैनलों में बदल गये हैं। ख़बरों के लिए दूरदर्शन लगाना पड़ता है। बेशक उसकी खबरों में सरकारी पुट होता है, पर वे ख़बरें तो होती हैं। मरहूम शायर क़ैसर-उल-जाफ़री के एक शेर के ज़रिए विश्वनाथ जी ने युवा पीढ़ी को पत्रकारिता के धर्म की याद दिलाई-

हम आईने हैं दिखाएंगे दाग़ चेहरों के
जिसे ख़राब लगे सामने से हट जाए!


श्रोता समुदाय में अगली पंक्ति में (बाएं से दाएं)-अमर उजाला के ब्यूरो प्रमुख हरि मृदुल, सौम्य प्रकाशन की निदेशक रीना त्यागी, अमर उजाला के एसोसिएट एडीटर सुमंत मिश्र और नवभारत टाइम्स मुम्बई की उपसम्पादक कंचन श्रीवास्तव।

जी न्यूज के प्रोड्यूसर सुभाष दवे ने अपनी किताब ‘बिजनेस जर्नलिज्म’ का परिचय देते हुए कहा, 'यह एक नीरस और शुष्क विषय माना जाता है। लेकिन मैंने इसे पंचतंत्र की कहानियों की तरह एक कहानी के रूप में पेश करके सरस बनाने की कोशिश की हैं’।

वरिष्ठ जनसंपर्ककर्मी संजीव निगम ने अपनी किताब ‘जनसंपर्क’ का परिचय देते हुए कहा, 'आज जीवन के हर क्षेत्र में जनसंपर्क की जरूरत है। वह जनसंपर्क कैसा हो, किस तरह किया जाये, उसके टूल्स क्या हों, इन सभी का विवरण मैंने दिया। और अनेक केस स्टडी के साथ व्यावहारिक तरीके से दिया है।

सकाल टाइम्स के विशेष संवाददाता मृत्युंजय बोस ने अपनी किताब ‘फील्ड रिपोर्टिंग गाइड’ के बारे में बताया, 'यह युवा पत्रकारों के लिए एक मैन्युअल के रूप में है। रिपोर्टिंग करते समय ध्यान में रखी जाने वाली बातों को तो मैंने बताया ही है, तरह-तरह की खबरों के लिखने की शैली के उदाहरण भी दिये हैं।
नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी ने अपनी दो किताबें ‘स्पेशल रिपोर्ट’ और ‘फिल्मी स्कूप’ का परिचय दिया।

‘स्पेशल रिपोर्ट’ में जावेद इकबाल (फ्रीलांसर), जितेंद्र दीक्षित (स्टार न्यूज) मनोज जोशी (ए 2 जेड चैनल), नीता कोल्हाटकर (डीएनए), प्रबल प्रताप सिंह (आईबीएन 7), प्रभात शुंगलू (आईबीएन 7), प्रकाश दुबे (दैनिक भास्कर), स्वर्गीय प्रमोद भागवत (महाराष्ट्र टाइम्स), रामबहादुर राय (प्रथम प्रवक्ता के पूर्व संपादक), रवीश कुमार (एनडीटीवी), रवि शंकर रवि (नई दुनिया), शेखर देशमुख (फ्रीलांसर) और उमाशंकर सिंह (एनडीटीवी) के करियर की बेहतरीन रिपोर्ट हैं।

‘फिल्मी स्कूप’ में चंद्रकांत शिंदे (नई दुनिया), इम्तियाज अजीम (राष्ट्रीय सहारा), रूपेश कुमार गुप्ता (जी न्यूज), संदीप सिंह (महुआ), शिवानी त्रिवेदी (स्टार न्यूज), सुमंत मिश्र (अमर उजाला), विद्योत्तमा शर्मा, (बॉम्बे टाइम्स की पूर्व असिस्टेंट एडिटर) और विनोद तिवारी (फिल्मफेयर के पूर्व संपादक) के कैरियर की अनोखी एक्सक्लूसिव स्टोरीज हैं।

मरुधरा के अध्यक्ष सुरेन्द्र गाडिया ने मुख्य अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट किया। संस्था के उपाध्यक्ष रामस्वरूप अग्रवाल व महामंत्री राकेश मोरारका ने लेखकों का स्वागत किया। सौम्य प्रकाशन की निदेशक रीना त्यागी ने पुष्पगुच्छ देकर इन पाँच पुस्तकों के कवर डिज़ाइनर संजय खडपे और शिव पाण्डेय का सम्मान किया तथा सबके प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मुम्बई के कई गणमान्य पत्रकार व लेखक मौजूद थे। मुम्बई में यह आयोजन शुक्रवार 24 दिसम्बर 2010 की शाम को सम्पन्न हुआ।



आपका
देवमणिपांडेय

सम्पर्क : बी-103, दिव्य स्तुति,
कन्या पाडा, गोकुलधाम, फिल्मसिटी रोड,
गोरेगांव पूर्व, मुम्बई-400063, 98210-82126

गुरुवार, 14 जनवरी 2010

संगीत के जवाहरात : उस्ताद मो. सईद ख़ाँ भुवेन्द्र त्यागी

'संगीत के जवाहरात' के लोकार्पण समारोह में पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी, कवि-संचालक देवमणि पाण्डेय, वरिष्ठ सितारवादक अरविंद पारेख , विश्वविख्यात संतूरवादक पं।शिवकुमार शर्मा और उस्ताद मो. सईद ख़ाँ


संगीत के जवाहरात का लोकार्पण समारोह


हरियाणा के झज्जर घराने के सुप्रसिद्ध सारंगी वादक उस्ताद अब्दुल मजीद ख़ाँ और उनके जोड़ीदार तबला वादक मास्टर सिद्दीक़ को एक गायिका के साथ संगत करने के लिए भोपाल के नवाब के यहां से न्यौता आया। कार्यक्रम शाही हरम में था। आज़ादी से पहले के उस दौर में मर्दों को बेग़मों के सामने जाने की मनाही थी। इस लिए दोनों साजिन्दों की आँख पर पट्टी बांध दी गई। इस हाल में भी उस्ताद मजीद ख़ाँ ने सारंगी पर ऐसा रंग जमाया कि बेग़मों ने भाव विभोर होकर कहा - इनकी पट्टी खोल दो। यह रोचक क़िस्सा जिस किताब में दर्ज है उस किताब का नाम है 'संगीत के जवाहरात'। 

इस किताब के लेखक हैं हालैंड में रहने वाले भारतीय संगीतज्ञ उस्ताद मोहम्मद सईद ख़ाँ। सहलेखक हैं नवभारत टाइम्स, मुंबई के मुख्यउपसंपादक भुवेन्द्र त्यागी। इस पुस्तक में 115 रागों की 238 बंदिशों के बोल, अर्थ और स्क्रीनप्ले यानी सप्रसंग भावार्थ दिए गए गए हैं। पुस्तक के साथ में एक सीडी भी है जिसमें मो.सईद ख़ाँ के ओजस्वी स्वर में साढ़े सात घंटे का गायन है। तीन दशकों से पश्चिमी देशों में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में सक्रिय मो. सईद ख़ाँ झज्जर घराने के वारिस होने के साथ ही जयपुर घराने की गायिकी परम्परा के वरिष्ठतम सदस्यों में से एक हैं। उन्होंने संगीत को विज्ञान, कला और मनोरंजन का संगम मानने का सिंद्धांत प्रपादित किया। उनके वालिद उस्ताद अब्दुल मजीद ख़ाँ महान सारंगी वादक बुंदू ख़ाँ के शागिर्द थे। सन् 1921 में वे मुम्बई आए और यहां महान गायिका केसरबाई केरकर के साथ आजीवन संगत करके बहुत नाम कमाया। केसरबाई की गायिकी से वे इतने प्रभावित थे कि 1938 में उनके गुरु अल्लादिया ख़ाँ से गायन सीखा और अपने दोनों बेटों- सईद ख़ाँ और रशीद ख़ाँ को गायन का यह हुनर सिखाया। संगीत के इस विशाल ज्ञान और अपने विशद अनुभवों के निचोड़ को मो. सईद ख़ाँ ने एक ख़ूबसूरत पुस्तक का रूप दिया। इस महत्त्वपूर्ण कार्य में उनकी सहायता लेखक-पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी ने की। कुल मिलाकर उन्होंने पयाम सईदी के इस शेर को सार्थकता प्रदान की-

असासा माल और दौलत से बढ़कर छोड़ जाऊंगा
मैं मालूमात का गहरा समंदर छोड़ जाऊंगा

अंत में इस किताब से गुज़रे दौर का एक रोचक क़िस्सा और सुनिए। मुरादाबाद के संगीतज्ञ अशरफ़ ख़ाँ एक अलग तरह की अस्थायी बजाते थे। उस्ताद बुंदू ख़ाँ ने कहा-''मुझे वह अस्थायी सिखा दो।'' वे बोले- ''पहले आप मेरे बेटे की शादी करवा दो। उसकी शादी कहीं नहीं हो रही है।'' यह सुनकर उस्ताद बुंदू ख़ाँ आग बबूला हो गए। घर जाकर उन्हें याद आया कि उनके किसी मामा की लड़की बेवा या तलाकशुदा है। उन्होंने मामा से बात की और अशरफ़ ख़ाँ के बेटे के साथ उनकी लड़की की शादी करवा दी। इस तरह उन्होंने अस्थायी सीखकर ही दम लिया। 'संगीत के जवाहरात' पुस्तक वाणी प्रकाशन नई दिल्ली से पिछले साल प्रकाशित हुई । इसका मूल्य 495/- रूपए है।


सम्पर्क : भुवेन्द्र त्यागी 098691-76433 
bhuvtyagi@gmail.com


आपका-

देवमणि पांडेय

सम्पर्क : बी-103, दिव्य स्तुति, 
कन्या पाडा, गोकुलधाम, फ़िल्म सिटी रोड, 
गोरेगांव पूर्व, मुम्बई-400063, 98210 82126