Recent Posts

Friday, October 11, 2013

सिने गीतकार अभिलाष को गीत गौरव सम्मान




मुम्बई में 30 सितम्बर 2013 की शाम को आयोजित राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा एवं फिशरीज़ यूनीवर्सिटी के सम्मान समारोह में बाएं से (खड़े)- कवि देवकी नंदन बूबना, अतिथि आर.के.सिंह,पत्रकार शत्रुघ्न प्रसाद, कवयित्री रीना राज, आरजे शिल्पा राठी, डॉ.राजेश्वर उनियाल, कवि शेखर अस्तित्व, कवि-अभिनेता रवि यादव, विनीता यादव, पं.वी.नरहरि, चि्त्रकार जैन कमल, संचालक देवमणि पांडेय..बाएं से (बैठे)-शायर प्रमोद कुश, अतिथि अनिल सहगल, गायिका सीमा सहगल, गीतकार अभिलाष, शायर इब्राहीम अश्क, शायर रफ़ीक जाफ़र, शायर नवाब आरज़ू


सिने गीतकार अभिलाष को गीत गौरव सम्मान एवं कवि सम्मेल-मुशाइरा

राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा एवं फिशरीज़ यूनीवर्सिटी की ओर से में  30 सितम्बर 2013 को आयोजित एक भव्य समारोह में 'इतनी शक्ति हमें देना दाता' जैसा कालजयी गीत लिखने वाले सिने गीतकार अभिलाष को गीत गौरव सम्मान से विभूषित किया गया। समारोह में आयोजित कवि सम्मेलन-मुशाइरे का संचालन शायर देवमणि पांडेय ने किया। इसमें शिरकत करने वाले कवि-शायर थे- रफ़ीक जाफ़र, नवाब आरज़ू, इब्राहीम अश्क, प्रमोद कुश, रवि यादव, शेखर अस्तित्व, कवयित्री रीना पारीक और शिल्पा राठी।   

लोकार्पण समारोह में कवि संतोष कुमार झा, गायिका सीमा सहगल, साहित्यकार विश्वनाथ सचदेव, डॉ.राजेश्वर उनियाल, वरिष्ठ संगीतकार मोहिन्दरजीत सिंह, कवि- संचालक देवमणि पांडेय
 
गीत गौरव सम्मान से सम्मानित गीतकार अभिलाष को बधाई देते हुए समारोह के मुख्य अतिथि नवनीत हिंदी डाइजेस्ट पत्रिका के संपादक एवं वरिष्ठ साहित्यकार विश्वनाथ सचदेव ने कहा कि कि जैसे पं चंद्रधर शर्मा गुलेरी उसने कहा था कहानी से अमर हो गए, वैसे  ही आपका एक गीत ही आपको विश्व में लोकप्रिय बनाने के लिए काफी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अभिलाषजी सतत रचनारत हैं और अभी अनेक उत्कृष्ट रचनाएं सामने आएँगी। 
 
 सम्मानित गीतकार अभिलाष ने कहा- मैं यह सम्मान पाकर ख़ुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। इस तरह का सम्मान जीवन को एक नया उत्साह देता है। उन्होंने बताया कि विश्व की आठ भाषाओं में 'इतनी शक्ति हमें देना दाता' का अनुवाद हो चुका है और इसे वहाँ भी प्रार्थना गीत के रूप में गाया जाता है।

 गीतकार अभिलाष सपरिवार
मु्ख्य अतिथि एवं वरिष्ठ साहित्यकार विश्वनाथ सचदेव ने डॉ.राजेश्वर उनियाल के उपन्यास 'भाड़े का रिक्शा' का विमोचन किया और इस  उपन्यास को मुंबई के जीवन का यथार्थ चित्रण बताया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में संतोष कुमार झा (मुख्य उपपरिचालन प्रबंधक पश्चिम  रेलवे), वरिष्ठ संगीतकार मोहिन्दरजीत सिंह, गायिका सीमा सहगल और हिंदी सेवी श्री आर.के.सिंह अतिथि के रूप में मौजूद थे।


दीप जलाते कवि देवमणि पांडेय

राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा के का.अध्यक्ष शत्रुघ्न प्रसाद ने कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत भाषण किया। इस कार्यक्रम के संयोजक संगीतज्ञ पंडित वी.नरहरि  थे। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए वहाँ मौजूद सभी श्रोताओं का धन्यवाद किया और भरोसा दिलाया कि इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी करते रहेंगे।




               सिने गीतकार अभिलाष का स्वागत करत हुए डॉ.राजेश्वर उनियाल

सिने गीतकार अभिलाष का परिचय 


अभिलाषजी 38 सालों से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। आपने गीत के अलावा कई फ़िल्मों में बतौर पटकथा-संवाद लेखक भी योगदान किया है। कई टीवी सीरियल्स  की स्क्रिप्ट लिखी है। आपके लिखे गीत संगीत की दुनिया की अमूल्य थाती हैं। अपने विश्व प्रसिद्ध गीत 'इतनी शक्ति हमें देना दाता' के लिए अभिलाषजी तत्कालीन  राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है। इस गीत को देश के 6०० विद्यालयों में  प्रार्थना स्वरूप गाया जाता है। इतनी शक्ति हमें देना दाता के अलावा अभिलाषजी के लिखे साँझ भई घर आजा (लता), आज की रात न जा (लता), वो जो ख़त मुहब्बत में (ऊषा), तुम्हारी याद के सागर में (ऊषा), संसार है इक नदिया (मुकेश), तेरे बिन सूना मेरे मन का मंदिर (येसुदास) आदि सिने गीत भी बेहद लोकप्रिय हुए।

संवाद लेखन और गीत लेखन के लिए आपको सुर आराधना अवार्ड, मातो श्री अवार्ड, सिने गोवर्स अवार्ड, फिल्म गोवर्स अवार्ड, अभिनव शब्द शिल्पी अवार्ड, विक्रम उत्सव सम्मान और दादा साहेब फाल्के अकादमी अवार्ड जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।टीवी के लिए आपने अदालत, धूप छाँव, दुनिया रंग रंगीली, अनुभव, संसार, चित्रहार, रंगोली और ॐ नमो शिवाय जैसे अनेक लोकप्रिय धारावाहिकों में अपने कलम की छाप छोड़ी है।

आप फिल्म राइटर असोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी और आई.पी.आर.एस. के डाइरेक्टर का पद भी संभाल चुके हैं। साथ ही आपने अपने प्रोडक्शन हाउस मंगलाया क्रिएशन के तहत टीवी के लिए कई धारवाहिकों का निर्माण भी कर चुके हैं। ऐसी शानदार उपलब्धियों से हिंदी सिने जगत में रचनात्मक योगदान करने वाले वरिष्ठ गीतकार श्री अभिलाष को गीत गौरव सम्मान से विभूषित करना से संगीत प्रेमी गर्व का अनुभव कर रहें हैं। आइए हम सब दुआ करें कि वे इसी तरह कामयाबी का सफ़र तय करते रहें…… 


                                          सिने गीतकार अभिलाष


गीतकार अभिलाष का कालजयी गीत
इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर हो न
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे भूल कर भी कोई भूल हो न..

हर तरफ़ ज़ुल्म है, बेबसी है, सहमा सहमा-सा हर आदमी है
पाप का बोझ बढता ही जाये, जाने कैसे ये धरती थमी है
बोझ ममता का तू ये उठा ले, तेरी रचना का ये अँत हो न
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे भूल कर भी कोई भूल हो न..

दूर अज्ञान के हों अँधेरे, तू हमें ज्ञान की रौशनी दे
हर बुराई से बचते रहें हम, जितनी भी दे भली ज़िन्दग़ी दे
बैर हो न, किसी का किसी से. भावना मन में बदले की हो न
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे भूल कर भी कोई भूल हो न..

हम न सोचें हमें क्या मिला है, हम ये सोचें किया क्या है अर्पण
फूल खुशियों के बाँटें सभी को सबका जीवन ही बन जाये मधुबन
अपनी करुणा का जल तू बहाकर, करदे पावन हरेक मनका कोना
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे भूल कर भी कोई भूल हो न..

हम अँधेरे मे हैं रौशनी दे, खो न दें खुद को ही दुश्मनी से
हम सज़ा पायें अपने किये की, मौत भी हो तो सह लें खुशी से
कल जो गुज़रा है फिर से न गुज़रे, आनेवाला वो कल ऐसा हो न
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे भूल कर भी कोई भूल हो न..

इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर हो न...


 

1 comment:

तिलक राज कपूर said...

इस कालजयी गीत को तो सम्‍मानों से लाद दिया जाना चाहिये।
जिसने भी सुना होगा, कठिनाई में गुनगुनाये बिना नहीं रह सकता।