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Monday, March 7, 2011

जब तलक रतजगा नहीं चलता

चित्र : कवि देवमणि पाण्डेय (माइक पर), शायर अब्दुल अहद साज़, शायर ज़फ़र गोरखपुरी, शायर हैदर नजमी और शायर सईद राही

जब तलक रतजगा नहीं चलता

संगीत सिखाने के लिए गायक राजकुमार-इंद्राणी रिज़वी ने न्यूयार्क में संगीत अकादमी शुरू की है। शिकागो और न्यू जर्सी में भी इसकी शाखाएं हैं। म्यूज़िक कं.ऑर्गन ने हाल ही में गायक राजकुमार रिज़वी का ग़ज़ल अलबम ‘तनहा तनहा’ जारी किया है। इसका लोकार्पण अमेरिका की संगीत अकादमी में हुआ। इस अलबम में मेरी दो ग़ज़लें शामिल है।आप भी इनका लुत्फ़ उठाएं! (चित्र : कवि देवमणि पाण्डेय का सम्मान कर रहीं हैं कवयित्री माया गोविंद)

[1]
जब तलक रतजगा नहीं चलता
इश्क़ क्या है पता नहीं चलता

और दिल के क़रीब आ जाओ
प्यार में फ़ासला नहीं चलता

उस तरफ़ चल के तुम कभी देखो
जिस तरफ़ रास्ता नहीं चलता

कोई दुनिया है क्या कहीं ऐसी
जिसमें शिकवा-गिला नहीं चलता

दिल अदालत है इस अदालत में
वक़्त का फ़ैसला नहीं चलता

लोग चेहरे बदलते रहते हैं
कौन क्या है पता नहीं चलता



[2]
चमन को फूल घटाओं को इक नदी मिलती
हमें भी काश कभी अपनी ज़िंदगी मिलती

जिधर भी देखिए दामन हैं तर ब तर सबके
कभी तो दर्द की शिद्दत में कुछ कमी मिलती

बहार आई मगर ढूँढती रही आँखें
कोई तो शाख़ चमन में हरी-भरी मिलती

बढ़ी जो धूप सफ़र में तो ये दुआ मांगी
कहीं तो छाँव दरख़्तों की कुछ घनी मिलती

उगाते हम भी शजर एक दिन मोहब्बत का
तुम्हारे दिल की ज़मीं में अगर नमी मिलती

1 comment:

नीरज गोस्वामी said...

बधाई बधाई बधाई बधाई....

नीरज