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Thursday, March 10, 2011

ख़यालों में तुम्हारे जब




चित्र : नेशनल कॉलेज बांद्रा, मुम्बई के एक संगीत समारोह में कवि देवमणि पाण्डेय, प्रिंसिपल डॉ.मंजुला देसाई और शास्त्रीय गायिका ज्योति गाँधी

ख़यालों में तुम्हारे जब

इकतारा फेम सूफी सिंगर कविता सेठ ने मुझसे कहा- एक ऐसी ग़ज़ल दीज़िए जिसमें दो पहलू हों। मुहब्बत करने वाला जब सुने तो उसे अपने महबूब की याद आ जाए और इबादत करने वाला सुने तो उसे अपने रब की याद आ जाए। मैंने ग़ज़ल उन्हें दे दी। आप बताइए कैसी लगी !

ग़ज़ल

ख़यालों में तुम्हारे जब कभी मैं डूब जाता हूँ
जिधर देखूँ नज़र के सामने तुमको ही पाता हूँ

मुहब्बत दो दिलों में फ़ासला रहने नहीं देती
मैं तुमसे दूर रहकर भी तुम्हें नज़दीक पाता हूँ

किसी लम्हा, किसी भी पल ये दिल तनहा नहीं होता
तेरी यादों के फूलों से मैं तनहाई सजाता हूँ

तेरी चाहत का जादू चल गया है इस तरह मुझ पर
ख़ुशी में रक्स करता हूँ, मैं ग़म में मुस्कराता हूँ

मेरे दिल पर, मेरे एहसास पर यूँ छा गए हो तुम
तुम्हें जब याद करता हूँ मैं सब कुछ भूल जाता हूँ

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