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Monday, February 8, 2010

देवमणि पांडेय के दस मुक्तक


देवमणि पांडेय के दस मुक्तक

(1)
सफ़र में सभी हैं ख़बर है ये किसको
कहाँ मंज़िलें हैं, ठिकाना किधर है
उन्हीं को फ़क़त राह देती है दुनिया
जिन्हें ये पता है कि जाना किधर है
(2)
बड़ी ज़ालिम है दुनिया ज़ख़्म भी सीने नहीं देगी
ख़ुशी का एक क़तरा भी हमें पीने नहीं देगी
अगर टकराके इससे इक क़दम भी हट गए पीछे
तो सारी उम्र फिर ये चैन से जीने नहीं देगी
 (3)
कश्ती अगर हो इश्क़ की लहरों के दरमियां
ये कौन चाहता है किनारा नहीं मिले
किसने तुम्हारे हाथ से पतवार छीन ली
क्यूँ तुम बिछड़के हमसे दुबारा नहीं मिले
(4)
बिछड़े हुए तो हमको ज़माना हुआ मगर
तुम दिल में कसक बनके सताती हो आज भी
तुमने तो ये कहा था मिलेंगे न अब कभी
फिर क्यूँ हमारे ख़्वाब में आती हो आज भी
(5)
लाज़िम है चाहतों में कुछ तो नया भी हो
थोड़ी सी बेरुख़ी हो कुछ फ़ासला भी हो
मेरे तुम्हारे इश्क़ को कई साल हो गए
दिल चाहता है कोई तुम्हारे सिवा भी हो
(6)
आँखों में अपनी प्यार का काजल लगा के देखे
मेंहदी का रंग हाथ में अपने सजा के देखे
दिल की हसीन दुनिया लिख दूँ मैं नाम तेरे
ये शर्त है कि मुझको तू मुस्कराके देखे
 (7)
कभी बेहोश कभी होश में आने वाले
ज़रा सी बात पे ही जोश में आने वाले
गले मिलना जो किसी से तो सँभलकर मिलना
जान ले लेते हैं आग़ोश में आने वाले
(8)
ग़मज़दा आँखों का पानी एक है
और ज़ख़्मों की निशानी एक है
हम दिलों की दास्ताँ किससे कहें
आपकी मेरी कहानी एक है।
(9)
मुश्किल सफ़र हो फिर भी मंज़िल तुम्हें मिले
मझधार में हो नाव तो साहिल तुम्हें मिले
हमने ख़ुदा से रात दिन माँगी है ये दुआ
हर हाल में जो ख़ुश रहे वो दिल तुम्हें मिले
(10)
जिसे तुम दिल से अपना मान लोगे
वही रिश्ता तुम्हें सच्चा लगेगा
किसी दिन पास तो आओ हमारे
मिलोगे हमसे तो अच्छा लगेगा


देवमणि पांडेय : 98210-82126
devmanipandey@gmail.com 


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3 comments:

सतपाल ख़याल said...

इक संग दिल के सामने फरियाद क्यों करें
करता नहीं है वो तो उसे याद क्यो करें
सब कुछ नहीं है प्यार तो हम अपनी ज़िदगी
इक बेवफ़ा के वास्ते बरबाद क्यों करें

wahwa!!sahi kaha aapne

sumita said...

दोस्ती में अब मेरी दिलचस्पियां कम हो गईं
...बहुत ही सुंदर मुक्तक हैं ..सभी एक से बढ्कर एक हैं देवमणि जी बधाई इतनी खूबसूरत पंक्तियों के लिये..

नीरज गोस्वामी said...

बहुत खूब रचनाएँ हैं देव मणि जी...आपको पढना एक सुखद एहसास से गुजरने जैसा है...
नीरज