Recent Posts

Friday, January 15, 2010

इश्क़ ने हमको सौग़ात में क्या दिया






देवमणि पांडेय की दो ग़ज़लें
 (1)
दिल ने चाहा बहुत पर मिला कुछ नहीं
ज़िन्दगी हसरतों के सिवा कुछ नहीं

उसने रुसवा सरेआम मुझको किया
उसके बारे में मैंने कहा कुछ नहीं

इश्क़ ने हमको सौग़ात में क्या दिया
ज़ख़्म ऐसे कि जिनकी दवा कुछ नहीं

पढ़के देखीं किताबें मुहब्बत की सब
आँसुओं के अलावा लिखा कुछ नहीं

हर ख़ुशी मिल भी जाए तो क्या फ़ायदा
ग़म अगर न मिले तो मज़ा कुछ नहीं

ज़िन्दगी मुझसे अब तक तू क्यों दूर है
दरमियां अपने जब फ़ासला कुछ नहीं

(2)
इस दिल को जो मिला है वो दर्द किससे बाँटें
पत्थर की बस्तियों में हम उम्र कैसे काटें

ये क्या हुआ लबों की मुस्कान क्यों है ज़ख़्मी
बच्चों को आप डाँटें ऐसे मगर न डाटें

है वक़्त का तक़ाज़ा नज़रों में वो हुनर हो
कंकड़ के ढेर से बस हीरों को आप छाँटें

दिन का हरेक लम्हा वो दर्द दे गया है
तारे न हम गिनें तो रातों को कैसे काटें

साकार होगी उस पल ख़्वाबों की एक दुनिया
जो बीच हैं दिलों के उन दूरियों को पाटें

नई नवेली दुल्हन जैसी हर पल लगती नई
प्यार से इसको सब कहते हैं आई लव यू मुंबई

देवमणि पांडेय : 98210-82126
devmanipandey@gmail.com 


No comments: