रविवार, 24 मई 2026

चित्रनगरी संवाद मंच में 'कौन देस को वासी'

 

चित्रनगरी संवाद मंच में कौन देस को वासी पर चर्चा 

साहित्य, संवाद और विमर्श की यह एक आत्मीय शाम थी। रविवार 24 मई 2026 को चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई में प्रख्यात कथाकार सूर्यबाला के महत्वपूर्ण उपन्यास "कौन देस को वासी" (वेणु की डायरी) पर चर्चा का आयोजन किया गया। किसी ने सोचा नहीं था कि किसी संजीदा किताब पर चर्चा इतनी भी रोचक हो सकती है। हंसते, मुस्कुराते, ठहाके लगते कब चर्चा पूर्णता के मुक़ाम पर पहुंच गई पता ही नहीं चला। 

▪️ प्रस्तावना पेश करते हुए कार्यक्रम के संचालक देवमणि पांडेय ने कहा कि इस पुस्तक में तीन पीढियों की महागाथा है। दो देशों की संस्कृतियों के द्वंद्व को, वहाँ प्रवास कर रहे भारतीयों के भावनात्मक अकेलेपन और अपनी जड़ों से जुड़ाव को जिस बारीक़ी से सूर्यबाला जी ने उकेरा है वह बेमिसाल है। 

▪️ पुस्तक की पठनीयता की तारीफ़ करते हुए गंगा शरण सिंह ने जीवंत भाषा, आत्मीय शैली और वसुधा के स्वाभिमानी चरित्र पर प्रकाश डाला।  

▪️ सविता मनचंदा ने वेणु की मां के चरित्र का आकलन करते हुए कहा कि सूर्यबाला जी ने रिश्तों को गहराई से गढ़ा है। 

▪️ रेखा निगम ने प्रवासी भारतीय की समस्याओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि सूर्यबाला जी ने अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों का यथार्थ चित्रण किया है। 

▪️ चित्रा देसाई ने इस पुस्तक के कुछ प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पुस्तक अंधेरे में उजास की तरह है। 

▪️ सुदर्शना द्विवेदी ने सूर्यबाला जी की सुदीर्घ लेखन यात्रा को रेखांकित करते हुए उनकी 'चिड़िया जैसी मां' कहानी के हवाले से मां और बेटे के रिश्ते की मार्मिक व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि इस अकेली कृति 'वेणु की डायरी' के ज़रिए सूर्यबाला जी इतिहास में दर्ज हो चुकी हैं। 

▪️ डॉ उषा मिश्र ने इसे आज के दौर की एक महत्वपूर्ण कृति बताया। 

▪️ हरि मृदुल ने कहा कि समय के साथ इस पुस्तक की चमक लगातार बढ़ती जा रही है। 

▪️ चर्चित चित्रकार आबिद सुरती उर्फ़ ढब्बू जी इसे रचनात्मकता का कीर्तिमान बताया। उन्होंने अपनी किताब भेंट करके सूर्यबाला जी को शुभकामनाएं दीं।


▪️ यह भी एक रोमांचक दृश्य था जब नौ महिला रचनाकारों ने एक-एक प्रश्न पूछकर सूर्यबाला जी से सम्वाद किया। इनके नाम हैं - डॉ मधुबाला शुक्ल, प्रतिमा सिन्हा, ममता झा, मधु चौधरी, पारमिता षडंगी, वर्षा गर्ग, अंबिका झा, अनामिका शर्मा और डॉ भारती सिंह। 

▪️ कवि सुभाष काबरा की व्यंग्य रचना पाठ से कार्यक्रम का समापन हुआ। 'वेणु की डायरी' पुस्तक को व्यास सम्मान से नवाज़ा जा चुका है। सुभाष काबरा ने जब सूर्यबाला जी से पूछा- "सम्मान स्वरूप जो चार लाख रुपये प्राप्त हुए उसका आपने क्या किया" तो इस सवाल पर ज़ोरदार ठहाका लगा। 

▪️ सूर्यबाला जी ने सभी सवालों के जवाब बेहद विनम्रता से दिए। उन्होंने इस तथ्य को स्पष्ट किया कि 'वेणु की डायरी' उपन्यास में कोई भी पात्र काल्पनिक नहीं है। उन्होंने कहा कि अच्छा लिखने के लिए संयम ज़रूरी है। सूर्यबाला जी ने अपनी किताब के चरित्रों के बारे में और प्रमुख घटनाओं पर विस्तार से बातें कीं। उन्होंने आर्थिक मंदी के बारे में पूछे गए सवाल का भी जवाब दिया। चर्चा को पूर्णता प्रदान करते हुए उन पंक्तियों को उद्धरित किया गया जो इस उपन्यास के अंत में दर्ज हैं-

▪️ "इस पूरे विश्व में हम कहीं रहें, किसी भी जाति, धर्म, वर्ण के नाम से, क्या फ़र्क़ पड़ता है, सिवा इसके कि हम कितने मनुष्य बने रह पाए हैं ! "

▪️ कुल मिलाकर यह एक ऐसा शानदार और यादगार कार्यक्रम था जो हमारी मधुर यादों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। 

आपका : देवमणि पांडेय - 98210 82126 


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