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Wednesday, March 10, 2010

रेखा मैत्र के सम्मान में जीवंती फाउंडेशन की काव्य गोष्ठी

राम गोविंद, अरविंद राही ,बोधिसत्व, अरुण अस्थाना, रेखा मैत्र, माया गोविंद, हैदर नज़्मी, देवमणि पाण्डेय

अमेरिका से रेखा मैत्र ने मेल किया- आपसे मिलने मुम्बई आ रही हूँ। मैंने वरिष्ठ कवयित्री माया गोविंद जी को फोन लगाया। माया जी जोश में आ गईं- अरे मेरे घर पर शनिवार को एक गोष्ठी रख लो। कई दिन से मेरी तबियत ठीक नहीं है। तुम लोगों की कविताएं सुनकर मेरी तबियत सुधर जाएगी। बस कवयित्री रेखा मैत्र के सम्मान में जीवंती फाउंडेशन की ओर से जुहू में माया गोविंद जी के आवास पर एक काव्य संध्या का आयोजन हो गया। बनारस (उ.प्र.) में जन्मीं रेखा मैत्र की उच्च शिक्षा सागर (म.प्र.) में हुई। मुम्बई में कुछ साल अध्यापन करने के बाद मेरीलैण्ड (अमेरिका) में बस गईं। यहाँ भाषा के प्रचार-प्रसार से जुड़ी संस्था ‘उन्मेष’ के साथ सक्रिय हैं। रेखा जी के अब तक दस कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं।यह हमारी पहली मुलाक़ात थी। रेखाजी उमंग, ऊर्जा और जोश से भरपूर हैं। उन्होंने अपने जीवंत व्यहार और संवेदनशील कविताओं से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
उनकी एक कविता चिड़िया देखिए-
इस मटियाली इमारत में
चिड़िया भी सहमी सहमी घूम रही है !
गोया इसे भी डर है कि
कहीं इसे भी क़ैद न कर लिया जाए !
अपने पंखों का अहसास भूल ही गई है शायद !



श्रीमती बॉबी, सुमीता केशवा, रेखा मैत्र, माया गोविंद, कविता गुप्ता, उमा अरोड़ा
अस्वस्थ होने के बावजूद माया गोविंद ने तरन्नुम में ग़ज़ल सुनाकर सबको भावविभोर कर दिया-

सूनी आँखों में जली देखीं बत्तियाँ हमने
जैसे घाटी में छुपी देखीं बस्तियाँ हमने
अब भटकते हैं य़ूँ सहरा में प्यास लब पे लिए
हाय क्यूँ बेच दी सावन की बदलियाँ हमने

समकालीन हिंदी कविता के जाने-माने हस्ताक्षर डॉ.बोधिसत्व ने ‘तमाशा’ कविता का पाठ किया।कुछ पंक्तियाँ देखिए-

तमाशा हो रहा है
और हम ताली बजा रहे हैं
मदारी साँप को दूध पिला रहा हैं
हम ताली बजा रहे हैं
अपने जमूरे का गला काट कर
मदारी कह रहा है-'ताली बजाओ जोर से'
और हम ताली बजा रहे हैं
कई बड़ी फ़िल्में और धारावाहिक लिख चुके प्रतिष्ठित फ़िल्म लेखक राम गोविंद शायर भी हैं, इस बात को सिर्फ़ उनके यार-दोस्त ही जानते हैं। लीजिए उनका शायराना अंदाज़ देखिए-

वो समझते थे दिल की जाँ सा है
क्या पता था कि वो जहाँ सा है
आह की हमसे बड़ी भूल हुई
वो समझते थे बेज़ुबाँ सा है

टाइम्स म्यूज़िक द्वारा जारी सूफ़ी अलबम ‘रूबरू’ से लोक प्रिय हुए युवा शायर हैदर नज़्मी ने एक बेहतर नज़्म पेश करने के साथ ही ग़ज़ल सुनाकर समाँ बाँधा-

तुम्हें इस दिल ने जब सोचा बहुत है
हँसा तो है मगर रोया बहुत है
मुझे अब ज़िंदगी भर जागना है
कि मुझपे ख़्वाब का क़र्ज़ा बहुत है
कवि-गीतकार देवमणि पाण्डेय ने भी ग़ज़ल सुनाकर इस ख़ूबसूरत सिलसिले को आगे बढ़ाया-

इस ग़म का क्या करें हम तनहाई किससे बाँटें
जो भी मिली है तुमसे रुसवाई किससे बाँटें
तेरी मेरी ज़मीं तो हिस्सों में बँट गई है
यह दर्द की विरासत मेरे भाई किससे बाँटें

कथाकार अरुण अस्थाना ने सामयिक कविता का पाठ किया। श्रीमती सुमीता केशवा ने औरत के अस्तित्व पर और कविता गुप्ता ने तितलियों के तितलाने पर कविता सुनाई। अनंत श्रीमाली ने व्यंग्य कविता और अरविंद राही ने ब्रजभाषा के छंद सुनाए। जीवंती फाउंडेशन की ओर से श्रीमती बॉबी ने रेखा मैत्र का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया। श्रीमती माया गोविंद ने रेखा जी को अपना काव्य संकलन भेंट किया। इस अवसर पर श्रीमती उमा अरोड़ा और श्रीमती कुमकुम मिश्रा अतिथि के रूप में मौजूद थीं।सॉरी ! इस बार भी मैं अपने प्रिय मित्र नीरज गोस्वामी और चंद्रकांत जोशी को आमंत्रित करना भूल गया।आशा है हमेशा की तरह इस बार भी ये लोग मुझे माफ़ कर देंगे।

देवमणि पांडेय : 98210-82126
devmanipandey@gmail.com 


1 comment:

नीरज गोस्वामी said...

देवमणि भाई आपके शब्दों के माध्यम से काव्य गोष्ठी का आनंद ले लिया..इतने कमाल के लिखने वाले जब एक साथ जमा हों तो आनंद बिना आये जायेगा कहाँ...इस बार आपका साथ नहीं मिला आप भूल गए कोई बात नहीं फिर सही...उम्मीद है ऐसे मौके बार बार आते रहेंगे...आपने मुझे याद रखा ये ही मेरे लिए बहुत है.
नीरज