Tuesday, August 15, 2017

उसने मुझको हंसकर देखा : देवमणि पांडेय की ग़ज़ल



देवमणि पांडेय की ग़ज़ल 

उसने मुझको हंसकर देखा और तनिक शरमाई भी 

लूट लिया दिल शोख़ अदा ने वो मेरे मनभाई भी

पलक झपकते हुआ करिश्मा ख़ुशबू जागी आंखों में 

साथ हमारे महक उठी है आज बहुत पुरवाई भी

ये रिश्ता है नाज़ुक रिश्ता इसके हैं आदाब अलग 

ख़्वाब उसी के देख रहा हूँ जिसने नींद उड़ाई भी

छलनी दिल को जैसे तैसे हमने आख़िर रफ़ू किया 

मगर अभी तक कुछ ज़ख़्मों की बाक़ी है तुरपाई भी

प्यार-मुहब्बत की राहों पर सोच समझकर पांव रखो 

परछाईं बनकर चलती है साथ-साथ रुसवाई भी

उसकी यादों की ख़ुशबू से दिल कुछ यूं आबाद रहा 

मैं भी ख़ुश हूं मेरे घर में और मेरी तनहाई भी



98210-82126 ….. devmanipandey@gmail.com

No comments: