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Saturday, October 23, 2010

उज्जैन में विश्व हिंदी सेवा सम्मान समारोह




डॉ.शैलेन्द्रकुमार शर्मा,गायिका कविता सेठ,गीतकार स्वानंद किरकिरे,नवनीत के सम्पादक विश्वनाथ सचदेव,उज्जैन संभाग के डीआईजी पवन जैन, अभिनेत्री नेहा शरद,सम्पादक राजुलकर राज, मालवा रंगमंच समिति के संस्थापक-अध्यक्ष केशव राय ,कवि-उदघोषक देवमणि पाण्डेय

अगर किसी पर दिल आ जाए
शायरी के बारे में कहा जाता है- पसंद अपनी-अपनी। कभी-कभी जिस शेर को हम बहुत साधारण समझते हैं वह दूसरे इंसान को बहुत अच्छा लगता है। अगर शेर को पसंद करने वाला इंसान ख़ुद आपसे इज़हारे-ख़याल कर दे तो इससे बड़ा पुरस्कार क्या हो सकता है ! कुछ ऐसा ही पुरस्कार मुझे उस वक्त मिला जब मैंने कालिदास अकादमी (उज्जैन) के सभागार में रविवार 12 सितम्बर 2010 को आयोजित काव्यसंध्या में दो ग़ज़लें सुनाईं। कार्यक्रम की समाप्ति पर सबसे पहले समारोहाध्यक्ष विश्वनाथ सचदेव [सम्पादक नवनीत,मुंबई] ने बधाई दी- यार, तुम इतनी बढ़िया ग़ज़लें कहते हो यह मुझे आज पता चला। फिर डॉ.अन्जना संधीर [यूएसए] ने मुक्तकंठ से तारीफ़ की। सामने श्रोताओं में बैठे हुए वरिष्ठ कथाकार एस आर हरनोट [शिमला] सीधे मंच पर आ गए और हाथ मिलाकर मुबारकवाद दी। मंच से नीचे उतरते ही देखा-सामने हाथ में क़लम-काग़ज़ लिए चर्चित कथाकार डॉ.महुआ मांझी [रांची] मुस्करा रहीं थी।बोलीं -मुझे ज़रा मर जाने वाला शेर लिख दीजिए। मैंने लिख दिया। वो शेर यूँ था-

अगर किसी पर दिल आ जाए इसमें दिल का दोष नहीं
अच्छा चेहरा देखके हम भी मर जाते हैं कभी
 
उल्लेखनीय है कि एस आर हरनोट और डॉ.महुआ मांझी दोनों बहुत अच्छे कथाकार माने जाते हैं और दोनों को बर्मिंघम पैलेस (लंदन) में अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान से नवाज़ा जा चुका है।फिलहाल आगे बढ़ने से पहले पूरी ग़ज़ल का लुत्फ़ उठाइए-

ख़्वाब सुहाने दिल को घायल कर जाते हैं कभी कभी
अश्कों से आँखों के प्याले भर जाते हैं कभी कभी

पल पल इनके साथ रहो तुम इन्हें अकेला मत छोड़ो
अपने साए से भी बच्चे डर जाते हैं कभी कभी

खेतों को चिड़ियां चुग जातीं बीते कल की बात हुई
अब तो मौसम भी फ़सलों को चर जाते हैं कभी कभी

आँख मूँदकर यहाँ किसी पर कभी भरोसा मत करना
यार-दोस्त भी सर पे तोहमत धर जाते हैं कभी कभी

मेरे शहर में मिल जाते हैं ऐसे भी कुछ दीवाने
रात-रात भर सड़कें नापें घर जाते हैं कभी कभी

दुनिया जिनके फ़न को अकसर अनदेखा कर देती है
वे ही इस दुनिया को रोशन कर जाते हैं कभी कभी

अगर किसी पर दिल आ जाए इसमें दिल का दोष नहीं
अच्छा चेहरा देखके हम भी मर जाते हैं कभी कभी

ना पीने की आदत हमको ना परहेज़ है पीने से
हम भी जाते हैं मयख़ाने पर जाते हैं कभी कभी

दिवस के उपलक्ष्य में 12 सितम्बर 2010 को कालिदास संस्कृत अकादमी (उज्जैन) में अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद और विश्व हिंदी सेवा सम्मान समारोह एवं काव्य संध्या का आयोजन हुआ। काव्य संध्या में डॉ.अन्जना संधीर [यूएसए], कवि विश्वनाथ सचदेव [मुंबई], गीतकार स्वानन्द किरकिरे [मुंबई] ,यशवंत सिंह [दिल्ली ], सुश्री नेहा शरद, [मुंबई], डॉ.शिव चौरसिया [मालवा], पवन जैन [इंदौर], शायर देवमणि पाण्डेय [मुंबई], डॉ.पिलकेन्द्र अरोरा आदि ने अपनी रचनाओं से का पाठ किया। आल इज वेलफेम स्वानंद किरकिरे का बावरा मन, मीठी आवाज, और सहज-सरल व्यक्तित्व बहुतों को भाया। वे लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे। । थ्री इडियट के इस गीतकार को दो दिन बाद बहती है हवा गीत के लिए नेशनल अवार्ड घोषित हो गया।शरद जोशी की पुत्री व अभिनेत्री नेहा शरद ने स्व.शरद जोशी की याद ताजा़ करा दी। शरद जी की एक रचना का निराले अंदाज में पाठ कर उन्होंने बहुतों को अतीत की दुनिया में पहुंचा दिया। उज्जैन संभाग के डीआईजी पवन जैन ने काव्य संध्या के दौरान थोड़ा बोर किया लेकिन लोगों को यह अच्छा लगा कि पुलिस वाला होते हुए भी वे बेहद संवेदनशील, सरल व साहित्यिक व्यक्तित्व से लैस हैं।

उज्जैन में पधारें हिन्दी सेवियों का एक समूह चित्र
इस मौके़ पर उत्कृष्ट हिंदी सेवा के लिए देश-विदेश के अनेक साहित्यकार,संस्कृतिकर्मी और हिंदीसेवियों को विश्व हिंदी सेवा सम्मान से विभूषित किया गया। यहाँ सम्मानित हुये लोगों में अपने पहले ही उपन्यास मैं बोरिशाइल्ला से चर्चा में आयीं डॉ.महुआ मांझी [रांची], कथाकार एस आर हरनोट [शिमला], विदेश में हिन्दी की ध्वजा फहराने वाली लेखिका डॉ.अन्जना संधीर [यूएसए], वरिष्ठ साहित्यकार प्रो.नन्दलाल पाठक [मुंबई], नवनीत के सम्पादक विश्वनाथ सचदेव [मुंबई], फ़िल्म थ्री ईडियट के गीतकार स्वानंद किरकिरे [मुंबई], सिनेजगत की मशहूर गायिका कविता सेठ [मुंबई], कवि-उदघोषक देवमणि पाण्डेय [मुंबई], डॉ त्रिभुवननाथ शुक्ल [भोपाल], ऐतिहासिक उपन्यासकार डॉ.शरद पगारे [इंदौर],गीतकार चंद्रसेन विराट [इंदौर],वेब पत्रिका भड़ास फॉर मीडिया के सम्पादक यशवंत सिंह [दिल्ली],सम्पादक राजुलकर राज, समीक्षक डॉ.शैलेन्द्रकुमार शर्मा [उज्जैन], युवा पत्रकार सुबोध खंडेलवाल [इंदौर], समालोचक डॉ.करुणाशंकर उपाध्याय [मुंबई], हिंदी दैनिक नई दुनिया इंदौर की युवा पत्रकार गायत्री शर्मा, प्रथम हिंदी पोर्टल वेब दुनिया इंदौर के सहायक प्रबंधक भीका शर्मा, लेखक जवाहर कर्नावट [अहमदाबाद] आदि शामिल हैं।
अमेरिका की डा.अंजना संधीर ने अपने देश प्रेम व हिंदी प्रेम के जज्बे की ऐसी आत्मीय जानकारी दी कि उसे सुनकर हर एक शख़्सका दिल उनके प्रति सम्मान से भर उठा। डा.अंजना ने अमेरिका में हिंदी के लिए अपने संघर्ष की गाथा सुनाई और स्वीकार किया कि देश प्रेम का यह जज़्बा ही उन्हें दुबारा अमेरिका से भारत खींच लाया है और वे बच्चों सहित फिर से अहमदाबाद में रहने लगी हैं। डा.अंजना संधीर के बहुआयामी व्यक्तित्व की झलक इस आयोजन के जरिए मिली। बतौर टीचर, बतौर गायिका, बतौर कवयित्री, बतौर एक ह्यूमन बीइंग, बतौर महिला... वे हर मोर्चे पर श्रेष्ठ दिखीं। रांची से चलकर आईं युवा लेखिका डॉ.महुआ मांझी, और शिमला से पधारे कथाकार एस आर हरनोट ने बड़े असरदार ढंग से अपनी रचना यात्रा के बारे में जानकारी दी। जहाँ कम उम्र में ही उत्कृष्ट उपन्यास की रचना कर डॉ.महुआ मांझी न सिर्फ लोकप्रिय हुई हैं बल्कि लाखों लोगों की पसंदीदा लेखिका भी बन चुकी हैं वहीं पहाड़ी जीवन की अदभुत कथाएं लिखकर एस आर हरनोट ने कई पुरस्कार, सम्मान और प्रतिष्ठा अर्जित करके एक कीर्तिमान बनाया।
दोपहर में सभी अतिथियों ने उज्जैन शहर से करीब 15 किमी दूर विकलांग व बेसहारा लोगों के लिए बने आश्रम में जाकर पंगत में बैठकर भोजन किया और आश्रम की गतिविधियों के बारे में समाजसेवी सुधीर गोयल से जानकारी हासिल की। सभी ने सुधीर गोयल के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे अपनी उज्जैन यात्रा की विशिष्ट उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया।
वक्ताओं ने मालवा रंगमंच समिति, उज्जैन के संस्थापक-अध्यक्ष केशव राय की इसलिए जमकर तारीफ की कि उन्होंने निजी प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन किया और हिंदी क्षेत्र के प्रतिभाशाली लोगों को एक मंच पर बिठाकर बहुत कुछ रचने-कहने-जानने का मौका प्रदान किया। सरकारी फंड के जरिए हिंदी दिवस पर औपचारिकता पूरी करने वाले सरकारी विभागों व सरकारों को केशव राय से प्रेरणा लेनी चाहिए कि आखिर किस तरह एक व्यक्ति अपने दम पर एक सफल आयोजन कर हिंदी के उत्थान में अभूतपूर्व योगदान दे रहा है। अगले दिन श्री मध्यभारत हिंदी समिति, इंदौर में और प्रथम हिंदी पोर्टल वेब दुनिया के कार्यालय में हमारा सम्मान और कविता पाठ हुआ। इसके बारे में अगली किश्त का इंतजार कीजिए।

14 comments:

नीरज गोस्वामी said...

हुज़ूर आपका व्यक्तित्व, प्रतिभा और प्रस्तुतीकरण इतना आलीशान है के कोई भी आपका मुरीद हो सकता है...ऐसे मूर्धन्य साहित्यकारों को आपका कलाम पसंद आया ये कोई आश्चर्य की बात नहीं...आप निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हों और हमें ऐसी बेहतरीन ग़ज़लें पढ़ने को देते रहें बस ये ही दुआ करते हैं...

नीरज

manu said...

she'r waakai khoobsoorat hai...

aur akhiri she;r maykhaane waalaa bhi laajwaab hai...

manu said...

she'r waakai khoobsoorat hai...

aur akhiri she;r maykhaane waalaa bhi laajwaab hai...

pran said...

Smaroh kaa vivran padh kar bahut
achchhaaa lagaa hai . Lekin
aapkee gazal kee kya hee baat hai!
Dil mein utar gayee hai . yun hee
gazal kahte rahiye aur har kisee
kaa dil lubhaate rahiye . shubh
kamnaaon ke saath .

सुभाष नीरव said...

पूरी ग़ज़ल ही दिल में उतर-सी गई। हर शे'र लाजवाब है। बधाई !

योगेन्द्र मौदगिल said...

badhaiiiiiiiiiiiii.......

योगेन्द्र मौदगिल said...

badhaiiiiiiiiiiiii.......

निर्मला कपिला said...

आपको बहुत बहुत बधाई। इतनी अच्छी गज़ल के लिये भला कौन आपको दाद न देता
खेतों को चिड़ियां चुग जातीं बीते कल की बात हुई

अब तो मौसम भी फ़सलों को चर जाते हैं कभी कभी

आँख मूँदकर यहाँ किसी पर कभी भरोसा मत करना

यार-दोस्त भी सर पे तोहमत धर जाते हैं कभी कभी
पूरी गज़ल ही लाजवाब है। बहुत बहुत शुभकामनायें इसी तरह आगे बढते रहें। धन्यवाद।

kavi kulwant said...

bahut khoob.. haardik badhayee...
kulwant

तिलक राज कपूर said...

खुदको इस खूबसूरत ग़़ज़़ल पर एक शेर कहने से रोक नहीं सकता कि:
ग़ज़़लों की शाखों पर बैठे, नये परिंदे शेरों के
दिल से दिल तक इनसे निकले स्‍वर जाते हैं कभी कभी।

जनविजय said...

मेरे शहर में मिल जाते हैं ऐसे भी कुछ दीवाने
रातों-दिन सड़कों पर भटकें घर जाते हैं कभी कभी
अच्छा शेर देख कर हम भी मर गए भाई!!!!

Ila said...

बधाई | अच्छी शायरी और ब्लॉग पर अच्छी प्रस्तुति !
इला

sumita said...

समारोह की सुन्दर प्रस्तुति और खूबसूरत गज़ल के लिए बहुत-बहुत बधाई!!

ZEAL said...

बहुत बहुत बधाई।