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Thursday, October 10, 2013

वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी


5 comments:

Vijay Kumar Sappatti said...

जब से उनके निधन की खबर सुनी है , मन बहुत उदास है दोस्त. एक पूरी उम्र जी है उनकी गज़लों के साथ !!!
ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे.

विजय

pran sharma said...

GAZAL GAAYAK SAMRAAT JAGJIT SINGH
KEE YAAD MEIN AAPKA LEKH MAN KO
CHHOO GAYAA HAI . KASH ,AAPKEE
UMDAA GAZLON KO BHEE UNKA MAKHMALEE
SWAR MILTA ! SHAAYAD UNKEE YAAD MEIN HEE KISEE SHAAYAR NE KAHAA
HOGA -

BADE SHAUQ SE SUN RAHAA THA ZAMANA
HAMEE SO GAYE DAASTAAN KAHTE-KAHTE

नीरज गोस्वामी said...

जगजीत जी को भावभीनी श्रधांजलि...जगजीत सिंह जैसे लोग कभी मरते नहीं वो दुनिया छोड़ कर लोगों के दिलों में बस जाते हैं...

नीरज

sumita said...

बहुत अच्छा लेख है..जगजीत सिह के प्रति आपकी श्रद्धांजलि है यह लेख...हार्दिक श्रद्धांजलि !!!!

ANJU SHARMA said...

आपका लेख पढ़ा और जाना उनके बारे में जो सबको ग़मज़दा छोड़ कर चले गए, कभी लौट कर न आने के लिए....वैसे वे आज भी हम लोगों के दिलों में हैं और हमेशा रहेंगे......शुक्रिया