Recent Posts

Tuesday, April 12, 2011

ख़ुशियों में बड़ा लुत्फ़ है

मा.सार्थक अपने नाना देवमणि पांडेय के साथ


देवमणि पांडेय की पाँच ग़ज़लें


(1)

ख़ुशियों में बड़ा लुत्फ़ है, ये सबको पता है
ग़म से भी कभी गुज़रो, ग़म में भी मज़ा है

पल भर के लिए वो कभी रस्ते में मिला था
इस दिल पे मगर अपना निशां छोड़ गया है

ये धूप,धनक, चाँदनी, फूलों का तबस्सुम
इन सबमें तेरा अक्स है, तेरी ही अदा है

किस-किसने मुझे ज़ख़्म दिए,किसने दवा दी
अब सबके लिए लब पे मेरे सिर्फ़ दुआ है

राहों का पता ही नहीं, मंज़िल की ख़बर क्या
कुछ फ़िक्र नहीं साथ मेरे मेरा ख़ुदा है

(2)

कहाँ गई एहसास की ख़ुश्बू, फ़ना हुए जज़्बात कहाँ
हम भी वही हैं तुम भी वही हो लेकिन अब वो बात कहाँ

मौसम ने अँगड़ाई ली तो मुस्काए कुछ फूल मगर
मन में धूम मचा दे अब वो रंगों की बरसात कहाँ

मुमकिन हो तो खिड़की से ही रोशन कर लो घर-आँगन
इतने चाँद सितारे लेकर फिर आएगी रात कहाँ

ख़्वाबों की तस्वीरों में अब आओ भर लें रंग नया
चाँद, समंदर, कश्ती, हम-तुम,ये जलवे इक साथ कहाँ

इक चेहरे का अक्स सभी में ढूँढ रहा हूँ बरसों से
लाखों चेहरे देखे लेकिन उस चेहरे-सी बात कहाँ

(3)


दुख लम्बी राहों में भी सुख की थोड़ी आस रहे
फिर ख़ुशियों के पल आएँगे दिल में ये एहसास रहे

इस दुनिया की भीड़ में इक दिन हर चेहरा खो जाता है
रखनी है पहचान तो अपना चेहरा अपने पास रहे

आदर्शों को ढोते-ढोते ख़ुद से दूर निकल आए
और अभी जाने कितने दिन देखो ये वनवास रहे

लफ़्ज़ अगर पत्थर हो जाएँ रिश्ते टूट भी सकते हैं
बेहतर है लहजे में अपने फूलों-सी बू-बास रहे

कहीं भी जाऊँ दिल का मौसम इक जैसा ही रहता है
यादों के दरपन में कोई चेहरा बारो-मास रहे

(4)


न हो मायूस ऐसे दिल किसी का
छुपा है अश्क में चेहरा ख़ुशी का

तुम्हारा साथ छूटा तो ये जाना
यहां होता नहीं कोई किसी का

न जाने कब छुड़ा ले हाथ अपना
भरोसा क्या करें इस ज़िंदगी का

अभी तक ये भरम टूटा नहीं है
समंदर साथ देगा तिश्नगी का

भला किस आस पर ज़िंदा रहे वो
अगर हर ख़्वाब टूटे आदमी का

लबों से मुस्कराहट छिन गई है
ये है अंजाम अपनी सादगी का

(5)


कहाँ तक मैं दिन-रात आँसू बहाऊँ
तमन्ना है मैं भी कभी मुस्कराऊँ

कभी मैंने ख़ुद से लगाई थी बाज़ी
किसी दिन उसे भूलकर मैं दिखाऊँ

अभी तक ये दिल से बहस चल रही है
उसे याद रक्खूँ कि मैं भूल जाऊँ

ये जी चाहता है कि बन जाऊँ मोती
कभी उसकी पलकों पे मैं झिलमिलाऊँ

कभी उसकी यादों के घेरे से निकलूं
कभी मैं भी उसको बहुत याद आऊँ

5 comments:

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीय देवमणि पाण्डेय जी
सादर सस्नेहाभिवादन !

नेट पर अनियमित - सा हूं कई दिन से …
आज आपके यहां पहुंच कर हार्दिक प्रसन्नता है , एक साथ पांच नायाब ग़ज़लें पढ़ कर श्रेष्ठ सृजन की प्यास को तृप्ति मिली है , आभार !
… आशा है , नियमित आवागमन होता रहेगा अब ।

अभी तसल्ली से एक-दो बार फिर पढ़ूंगा … भरपूर आनन्द में डूबना चाहूंगा आपके अदबो-फ़न के सागर में … तब बात करूंगा इन ख़ूबसूरत ग़ज़लियात के बारे में …

* श्रीरामनवमी की शुभकामनाएं ! *


साथ ही…

*नव संवत्सर की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !*

नव संवत् का रवि नवल, दे स्नेहिल संस्पर्श !
पल प्रतिपल हो हर्षमय, पथ पथ पर उत्कर्ष !!

चैत्र शुक्ल शुभ प्रतिपदा, लाई शुभ संदेश !
संवत् मंगलमय ! रहे नित नव सुख उन्मेष !!


- राजेन्द्र स्वर्णकार

Kajal Kumar said...

वाह ! एक से बढ़ कर एक.

सुशील बाकलीवाल said...

शुभागमन...!
कामना है कि आप ब्लागलेखन के इस क्षेत्र में अधिकतम उंचाईयां हासिल कर सकें । अपने इस प्रयास में सफलता के लिये आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या उसी अनुपात में बढ सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको 'नजरिया' ब्लाग की लिंक नीचे दे रहा हूँ, किसी भी नये हिन्दीभाषी ब्लागर्स के लिये इस ब्लाग पर आपको जितनी अधिक व प्रमाणिक जानकारी इसके अब तक के लेखों में एक ही स्थान पर मिल सकती है उतनी अन्यत्र शायद नहीं । प्रमाण के लिये आप नीचे की लिंक पर मौजूद इस ब्लाग के दि. 18-2-2011 को प्रकाशित आलेख "नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव" का माउस क्लिक द्वारा चटका लगाकर अवलोकन अवश्य करें, इसपर अपनी टिप्पणीरुपी राय भी दें और आगे भी स्वयं के ब्लाग के लिये उपयोगी अन्य जानकारियों के लिये इसे फालो भी करें । आपको निश्चय ही अच्छे परिणाम मिलेंगे । पुनः शुभकामनाओं सहित...

नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव.

युवावय की चिंता - बालों का झडना ( धीमा गंजापन )

Poorviya said...

तमन्ना है मैं भी कभी मुस्कराऊँ......

jai baba banaras....

हल्ला बोल said...

-------- यदि आप भारत माँ के सच्चे सपूत है. धर्म का पालन करने वाले हिन्दू हैं तो
आईये " हल्ला बोल" के समर्थक बनकर धर्म और देश की आवाज़ बुलंद कीजिये...
अपने लेख को हिन्दुओ की आवाज़ बनायें.
इस ब्लॉग के लेखक बनने के लिए. हमें इ-मेल करें.
हमारा पता है.... hindukiawaz@gmail.com
समय मिले तो इस पोस्ट को देखकर अपने विचार अवश्य दे
देशभक्त हिन्दू ब्लोगरो का पहला साझा मंच
क्या यही सिखाता है इस्लाम...? क्या यही है इस्लाम धर्म