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Tuesday, February 2, 2010

आई लव यू मुंबई









 


आई  लव  यू  मुंबई

शहर हमारा जो भी देखे सपनों में खो जाता है
हरा समंदर जादू बनकर हर दिल पर छा जाता है

देख के होटल ताज की रौनक़ मदहोशी छा जाए
चर्चगेट का रोशन चेहरा दिन में चाँद दिखाए

चौपाटी की चाट चटपटी मन में प्यार जगाती है
भेलपुरी खाते ही दिल की हर खिड़की खुल जाती है

कमला नेहरु पार्क पहुँचकर खो जाता जो फूलों में
प्यार के नग़मे वो गाता है एस्सेल वर्ल्ड के झूलों में

जुहू बीच पर रोज़ शाम जो पानी-पूरी खाए
वही इश्क़ की बाज़ी जीते दुल्हन घर ले आए

नई नवेली दुल्हन जैसी हर पल लगती नई
प्यार से इसको सब कहते हैं आई लव यू मुंबई

देवमणि पांडेय : 98210-82126
devmanipandey@gmail.com 

4 comments:

नीरज गोस्वामी said...

देवमणि जी लगता है किसी भाई ने बन्दूक के जोर पर आपसे मुंबई की तारीफ़ में ये रचना लिखवाई है...ऐसी मुंबई कहाँ है जैसी आपने लिखी है...किसी ज़माने में थी...अब नहीं...चौपाटी की चाट खा कर बीमार होने से अच्छा है घर पर बैठ कर चने चबाये जाएँ...और कमला नेहरु पार्क तो पार्क के नाम पर धब्बा है...हाँ अंतिम दो पंक्तियाँ सच हैं या नहीं इसके परिक्षण के लिए आपकी गली और घर आना पड़ेगा...कब आऊँ ?

रोचक पोस्ट है जी...लिखते रहिये...

नीरज

सतपाल said...

khoob kahi lekin Neeraj ji sahi kah rahe haiN kisii ne jabadastee kavita likhwaii hai...anyways I am kidding ..keep posting ur poems and ghazals

sumita said...

सुंदर कविता है...अंतिम चार पंक्तियां आपने नई जोडी हैं जो कविता को सही अंजाम दे रही हैं और शायद इसीलिये नीरज जी भी इसे आजमाना चाह्ते हैं !

Ila said...

देव मणि जी,
आपको पढ़ती रहती हूँ| आप खूब लिखते हैं! आपकी कलम का जादू बना रहे....शुभकामनाएं!
इला