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Tuesday, December 29, 2009

मुबारक साल नया

(1)
आया नूतन साल मियां

नए साल में बदल गई है सबकी देखो चाल मियां
तुमसे कुछ भी छिपा नहीं है क्या बतलाएं हाल मिया

देखके टीवी पर विज्ञापन
रुठ गई बिटिया बबली
अपना चेहरा चमकाने को
मांगे फेयर एन लवली
नया दौर मां-बाप की ख़ातिर है जी का जंजाल मियां
तुमसे कुछ भी छिपा नहीं है क्या बतलाएं हाल मिया

फर्स्ट क्लास ग्रेजुएट है राजू
मगर नौकरी नहीं मिली
मजबूरी में पेट की ख़ातिर
बेच रहा है मूंगफली
कमोबेश सब पढ़े लिखों का इक जैसा अहवाल मियां
तुमसे कुछ भी छिपा नहीं है क्या बतलाएं हाल मिया

जिसमें झांको उसी आंख में
तैर रहा दुख का बादल
फिर भी यूँ हँसते हैं नेता
जैसे हँसते हैं पागल
ऊपर से ये ख़ुश लगते हैं भीतर हैं बेहाल मियां
तुमसे कुछ भी छिपा नहीं है क्या बतलाएं हाल मिया


यूँ गुज़रा है साल कि डोरी
उम्मीदों की टूट गई
स्टेशन पर पहुंचके जैसे
अपनी गाड़ी छूट गई
फिर भी हंसकर करेंगे स्वागत आया नूतन साल मियां
तुमसे कुछ भी छिपा नहीं है क्या बतलाएं हाल मिया

(2)
उम्मीद की नई सुबह

आकाश में दिन भर चलकर जब
घर लौटके सूरज आया है
तब शाम ने अपने आँचल में
हौले से उसे छुपाया है

सुरमई शाम की पलकों पर
कितने ही ख़्वाब मचलते हैं
यह देख रही किसका रस्ता
चाहत के दीपक जलते हैं

यह रात खिलेगी जब चंदा
जादू बनकर छा जाएगा
उस वक़्त कोई प्यारा सपना
इन आँखों को महकाएगा

उम्मीद की कल इक नई सुबह
धीमे से पलकें खोलेगी
ख़ुशियों से चेहरे चमकेंगे
जब साल मुबारक बोलेगी

3 comments:

kavi kulwant said...

waah ji mazaa aa gaya...

बसंत आर्य said...

ब्लाग जगत मे आते आते करने लगे धमाल मियाँ
चलो मुबारक आपको भी हो आने वाला साल मियाँ

नीरज गोस्वामी said...

फिर भी हंसकर करेंगे स्वागत आया नूतन साल मियां

और दूसरा चारा भी क्या है...बेहतरीन रचना...बधाई...
नीरज